Friday, 26 February 2016

दुनिया की 25 बड़ी आतंकवादी घटनाएं


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1793
आतंक का राज्य : यह हिंसा का ऐसा युग था जो कि 5 सितंबर, 1793 को शुरू हुआ था और फ्रांसीसी क्रांति के दौरान 28 जुलाई, 1794 को खत्म हुआ था। हिंसा के इस केन्द्र में गिरोदिन्स और जैकोंबिन्स थे, जिनकी मारकाट में 16 हजार 594 लोगों की मौत हुई थी। वास्तव में इन लोगों की गिलोटिन नामक यंत्र से सिर काटकर हत्या कर दी गई थी। 1795 में एडमंड बर्क ने इसके लिए पहली बार 'टेररिस्ट' (आतंकवादी) शब्द का उपयोग किया था। 

1858
फेलिस ओर्सिनी : ऑर्सिनी इटली के एक गुप्त राजनीतिक संगठन 'कोर्बिनरी' का नेता था, जिसने 14 जनवरी, 1858 को फ्रांस के तीसरे सम्राट नेपोलियन की हत्या की कोशिश की थी। जब नेपोलियन और साम्राज्ञी यूजिनी दि मोंतिजो थिएटर के लिए जा रहे थे तब उसने शाही बग्गी पर तीन बम फेंके थे। इस घटना में 8 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 142 लोग घायल हो गए थे। वह पोप को गद्दी से हटाने के षड्‍यंत्र में शामिल था और उसने नेपोलियन तृतीय को इसलिए मारने की कोशिश की थी क्योंकि वह मानता था कि ये लोग इटली की स्वतंत्रता में सबसे बड़े रोड़े थे। आश्चर्य की बात है कि उसके इन आतंकवादी कामों से प्रेरित होकर पहला रूसी आतंकवादी ग्रुप बने।

1920  
वॉल स्ट्रीट पर बमबारी : न्यूयॉर्क के वित्तीय इलाके में 16 सितंबर, 1920 को बमबारी की घटना हुई थी जिसमें 38 लोगों की मौत हो गई थी और 400 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इस घटना में बीस लाख डॉलर के नोट खराब हो गए थे। इस आतंकवादी हमले में घोड़े से खींची जाने वाली एक बग्घी में 45 किग्रा डायनामाइट था जो कि 230 किग्रा विस्फोटक के साथ जुड़ा था। जैसे ही विस्फोट हुआ कि जेपी मॉर्गन इमारत के अंदरूनी भाग में काम कर रहे ब्रोकर्स, क्लर्क्स, मेसेंजर्स (संदेशवाहक) और स्टेनोग्राफर्स मारे गए। इस अपराध का कभी खुलासा नहीं हुआ, लेकिन ऐसा माना जाता था कि इतालवी अराजकतावादी गुट गेल्लेअनिस्ट्‍स का इसके पीछे हाथ था। उस वर्ष बमबारी की कई घटनाओं में यह गुट शामिल था। इस घटना को श्रम संघर्ष, युद्धोपरांत सामाजिक अशांति और पूंजीवादी विरोधी आक्रमण के तौर पर देखा गया था।

1925
संत नेदेल्या चर्च पर हमला : यह हमला 16 अप्रैल, 1925 को किया गया था और इसके दौरान बुल्गारियन कम्युनिस्ट पार्टी (बीसीपी) के एक गुट ने संत नेदेल्या चर्च के गुंबद को उड़ा दिया था। इससे ठीक दो दिन पहले ही जनरल जॉर्जियेव की इसी गुट ने हत्या कर दी थी। वे शाम के समय सोफिया चर्च में सामूहिक प्रार्थना के लिए जा रहे थे। इस हमले में करीब 150 लोग मारे गए थे जिनमें से ज्यादातर प्रमुख सरकारी और सैन्य अधिकारी थे और इनके अलावा 500 लोग घायल हो गए थे। इस हमले का क्रियान्वयन बीसीपी के सैन्य संगठन ने किया था जिसे इस हमले का काम सौंपा गया था। इसके लिए चर्च के दक्षिणी प्रवेश द्वार के प्रमुख गुंबद के एक कॉलम्स पर 25 किग्रा के विस्फोटक का एक पैकेज लगा दिया गया था। इस बारूद में विस्फोट करने के लिए 15 मीटर लम्बा तार लगाया गया था ताकि हमलावरों को भागने का मौका मिल सके।

1946
किंग डेविड होटल पर बमबारी : 22 जुलाई, 1946 को विद्रोही दक्षिणपंथी यहूदी गुट, इर्गुन, ने किंग डेविड होटल स्थित ब्रिटिशों के फिलीस्तीन के लिए मुख्यालय को बम से उड़ा दिया था। इस आतंकवादी हमले में विभिन्न देशों के 91 लोग मारे गए थे। इनके अलावा 46 अन्य लोग घायल हुए थे। वर्ष 1920 से 1948 के दौरान ब्रिटिश शासन के दौरान यह सबसे भीषण आतंकवादी हमला था।

1978
सिनेमा रेक्स की आग : आगजनी की यह घटना ईरान के शहर अबादान में 19 अगस्त, 1978 को हुई थी। इस आग में 470 लोगों की मौत हो गई थी जिनमें से ज्यादातर लोगों की बहुत अधिक जलने से पहचान भी नहीं की जा सकी थी। जब एक ईरानी समाचारपत्र ने इस आशय की खबर दी थी कि इसके पीछे कट्टरपंथी इस्लामवादियों का हाथ था, इसे इस्लामी सरकार ने बंद करा दिया था। बाद में, यह बात सामने आई कि इस घटना के पीछे शाह विरोधी उग्रवादियों का हाथ था। 

1979
बड़ी मस्जिद पर कब्जा : यह आतंकवादी कृत्य वर्ष 1979 में 20 नवंबर से 5 दिसंबर तक चला था और इसके तहत मक्का की मस्जिद पर इस्लाम में परिवर्तन चाहने वाले विरोधियों ने कब्जा कर लिया था। विदित हो कि मक्का की यह मस्जिद इस्लामी जगत में बहुत पवित्र मानी जाती है। इन चरमपंथियों का नेता, मोहम्मद अब्दुल्लाह अल-काहतानी था जिसने घोषणा कर दी थी कि वह इस्लाम का 'मैहदी' या 'मुक्तिदाता' है और दुनिया के सभी मुस्लिमों को उसकी बातों का पालन करना चाहिए। इस अफरातफरी के दौरान सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम तीर्थयात्री वार्षिक हज यात्रा के लिए आए थे, उन्हें 'मैहदी' के समर्थकों ने बंधक बना लिया था। बाद में, मस्जिद में सुरक्षा बलों को बुलाया गया और दोनों ओर से गोलीबारी में सैकड़ों हजयात्री मारे गए थे। मरने वालों में सैकड़ों की संख्या मैहदी समर्थकों की भी थी। जब मस्जिद पर यह कब्जा समाप्त हुआ तब तक 255 हजयात्रियों, उग्रवादियों की जानें चली गई थीं और दोनों ओर से 500 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। 


 1983

बेरूत की बैरकों पर बमबारी : बड़ी आतंकवादी घटनाओं में शामिल यह घटना 1980 के दशक में हुई थी। यह घटना 23 अक्टूबर, 1983 में हुई थी और तब लेबनान की गृह यु्द्ध अपने चरम पर था। तब विस्फोटकों से भरे दो ट्रकों में अमेरिकी और फ्रांसीसी सेनाओं के लिए बनी बैरकों में भीषण विस्फोट हुआ था। इसकी जिम्मेदारी इस्लामिक जिहाद नाम के संगठन ने ली थी जोकि हिजबुल्लाह का छद्म नाम था और इसे ईरान के इस्लामी गणराज्य से पूरी मदद मिलती थी। दोनों ट्रकों में करीब 5400 किग्रा टीएनटी भरा हुआ था और इस विस्फोट से अमेरिकी मैरीन कॉर्प्स के इतने अधिक जवान मारे गए थे जितने कि कभी नहीं मरे होंगे। हमलों में 241 सैनिकों की मौत हुई थी। 

1988
पैन एम उड़ान में विस्फोट : इस घटना को 'लॉकरबी बमकांड' के नाम से भी जाना जाता है। यह घटना 21 दिसंबर, 1988 में हुई थी जब लंदन के हीथ्रो हवाई अड्‍डे से एक पैन एम ट्रांसअटलांटिक उड़ान, न्यूयॉर्क के जेएफके इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए जा रही थी। यह बोइंग 747-121 विमान था जिसे 'क्लिपर मेड ऑफ द सीज' का नाम दिया गया था। स्कॉटलैंड, लॉकरबी के तट पर एक जोरदार विस्फोट हुआ और विमान पर सवार सभी 243 यात्री मारे गए थे। विमान का मलबा जमीन पर गिरने से भी 11 लोगों की मौत हुई थी। विमान पर मरने वालों में चालकदल के 16 सदस्य भी शामिल थे। स्कॉटिश पुलिस और अमेरिकी एफबीआई ने मामले की तीन साल तक जांच की थी और पाया था कि विमान को उड़ाने की इस घटना के लिए 2 लीबियाई नागरिक जिम्मेदार थे। लीबियाई नेता मुअम्मर गद्दाफी ने इन नागरिकों को स्कॉटिश, अमेरिकी जांचकर्ताओं को सौंप दिया था। गद्दाफी ने पीड़ितों के परिजनों को हर्जाना राशि भी चुकाई लेकिन उनका दावा था कि इस विमान दुर्घटना में उनका कोई हाथ नहीं था।

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1993
मुंबई बमकांड : इस आतंकवादी हमले के तहत मुंबई (पूर्व के बॉम्बे) में तेरह बम विस्फोट कराए गए थे। यह हमला 12 मार्च, 1993 को किया गया था जिसमें 270 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा नागरिक घायल हुए थे। इन हमलों को एक अपराध संगठन 'डी कंपनी' के प्रमुख दाउद इब्राहीम के इशारे पर किया गया था। उसका कहना था कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हुई दिसंबर-जनवरी की हिंसा में 'बडे पैमाने पर मुस्लिमों के कत्लेआम का बदला' लिया गया था। 

1995
ओकलाहामा सिटी बमकांड : अमेरिका में 9/11 हमले से पहले यह एक और बड़ा आतंकवादी हमला था। यह बमकांड 19 अप्रैल, 1995 को किया गया था और इसके तहत में ओकलाहामा के अल्फ्रेड पी. मरे फेडरल बिल्डिंग में विस्फोट हुआ जिसमें बहुत सारे कार्यालय थे। हमले में 168 लोगों की मौत हुई थी और 800 से ज्यादा घायल हुए थे। इनमें 19 बच्चे भी शामिल थे जिनकी आयु छह वर्ष से भी कम थी। इस विस्फोट से 16 ब्लॉक के दायरे में 324 इमारतों को नुकसान पहुंचा था, विस्फोटों से 86 कारें जल गई थीं, समीपवर्ती 324 इमारतों के शीशे टूट गए थे और करीब 65 करोड़ 20 लाख डॉलर मूल्य की सम्पत्ति को नुकसान पहुंचा था। इस घटना को अंजाम देने वाले टिमोथी मैकवे को वर्ष 2001 में जहर का इंजेक्शन देकर मार दिया गया था। 

1997
बेंतलहा, अल्जीरिया पर हमला : इसे 'बेंतलहा हत्याकांड' के नाम से भी जाना जाता है। यह दुखद घटना 22-23 सितंबर, 1997 की दरम्यानी रात में हुई थी जब सशस्त्र गुरिल्लों ने इस गांव पर हमला करके 200 से लेकर 400 लोगों की हत्या कर दी थी। इसकी शुरुआत रात साढ़े ग्यारह बजे हाई अल दिलाजी के नारंगी के बगीचों के पास विस्फोट से हुई थी। इसके बाद मशीन गनों, धारदार हथियारों और शिकारी राइफलों से लेकर हमलावरों ने घर-घर जाकर पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की हत्या कर दी थी। इस नृशंस हत्याकांड की जिम्मेदारी एक हथियारबंद इस्लामी गुट ने ली थी जिसने पहले भी ऐसे बहुत से हत्याकांडों के लिए जिम्मेदार था। 

1998
अमेरिकी दूतावासों पर बमबारी : आतंकवादी हमलों के क्रम में पूर्वी अफ्रीका के शहरों, नैरोबी और दार ए सलाम के अमेरिकी दूतावासों पर हमला किया गया था। यह हमला, 7 अगस्त, 1998 को किया गया था जबकि सऊदी अरब में अमेरिकी फौजों के आगमन की वर्षगांठ मनाई जा रही थी। इस घटना में ट्रकों को बमों के तौर पर इस्तेमाल किया गया था और यह काम स्थानीय आतंकवादी गुट अल कायदा का था जिसका मुखिया ओसामा बिन लादेन था। इन ट्रकों में 3 से लेकर 17 टन तक ऊंचे किस्म के विस्फोटक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था। इस हमले में दो सौ से ज्यादा लोग मारे गए थे और हजारों की संख्या में लोग घायल हो गए। हालांकि यह हमला अमेरिकी संस्थानों पर था, लेकिन इन हमलों में ज्यादातर मारे गए लोग स्थानीय ही थे और केवल 12 अमेरिकियों की मौत हुई थी।  

2001
9/11 का हमला : 11 सितंबर, 2001 को अल कायदा ने न्यूयॉर्क और वाशिंगटन पर चार हमलों को अंजाम दिया था। इन हमलों के लिए 19 लोगों ने 4 विमानों का अपहरण किया और इनमें से अमेरिकी एयरलाइन की फ्लाइट 11 और यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 175 को न्यूयॉर्क शहर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के उत्तरी और दक्षिणी टॉवरों से टकरा दिया गया। करीब दो घंटे के बाद दोनों इमारतें पूरी तरह से धराशायी हो गईं और इनके साथ आसपास की इमारतें भी नहीं बचीं। तीसरे विमान, अमेरिकन फ्लाइट 77, से वर्जीनिया में पेंटागन की इमारत को निशाना बनाया गया था जबकि चौथे विमान यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 93 से वाशिंगटन डीसी में कैपिटल को निशाना बनाया जाना था, लेकिन विमान के यात्रियों के संघर्ष के कारण यह पेंसिलवानिया के एक खेत में गिर गया था। इन हमलों में तीन हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई।   

2002
बाली बमकांड : इंडोनेशिया के इतिहास में इसे का सबसे भीषण उदाहरण माना जाता है। 12 अक्टूबर, 2002 को हुई इस घटना में कूटा के पर्यटक क्षेत्र को निशाना बनाया गया था। इस बमकांड में 202 लोगों की मौत हुई थी जिनमें से ज्यादातर विदेशी पर्यटक थे। इनमें 38 स्थानीय नागरिक भी शामिल थे। स्थानीय नाइटक्लबों पर यह हमला जेमाह इस्लामिया नाम के आतंकवादी संगठन ने किया था। गुट के दो सदस्यों ने अपने बैकपैक में बमों को बांधकर खुद को विस्फोट से उड़ा लिया था। हमले में एक कार बम का भी इस्तेमाल किया गया था और एक तीसरा विस्फोट देनपासर स्थित अमेरिकी दूतावास में किया गया था। 

2004 
मैड्रिड की ट्रेनों पर बम हमले : इसे 'इलेवन एम' ने नाम से जाना जाता है। 11 मार्च, 2004 को मैड्रिड की केरसानिया यात्री ट्रेन पर बम विस्फोट किए गए थे। सिलसिलेवार बम विस्फोटों के पीछे आतंकवादी गुट अल कायदा का हाथ था। स्पेन के आम चुनावों से तीन दिन पहले हुए इन विस्फोटों में करीब 200 लोगों की मौत हो गई। 

2004 
सुपरफेरी पर विस्फोट : यह समुद्र पर हुआ सबसे भीषण हमला था जो कि 27 फरवरी, 2004 को हुआ था जिसमें सुपरफेरी समुद्र में डूब गई थी। यह फेरी कागयान डि ओरो सिटी जा रही थी और मनीला बंदरगाह से मात्र 90 मिनट पहले रवाना हुई थी। इस्लामी आतंकवादी गुट के इस हमले में 116 लोगों की मौत हो गई। शुरुआत में समझा गया था कि यह एक दुर्घटना थी, लेकिन बाद में जांचकर्ताओं को पता लगा कि फेरी पर विस्‍फोट करने के लिए एक टेलीविजय का इस्तेमाल किया गया था। टीवी सेट में करीब 4 किग्रा टीएनटी भरा गया था। हालांकि इस हमले की जिम्मेदारी कई गुटों ने ली थी लेकिन बाद में ज्ञात हुआ था कि यह अबू सय्याफ गुट का काम था। 

2005
लंदन ट्रांसपोर्ट बमबारी : सात जुलाई, 2005 को लंदन की अंडरग्राउंड ट्रेनों में तीन बम विस्फोट हुए थे, जबकि एक चौथा टैवीस्टॉक चौराहे पर एक डबल डेकर बस में हुआ था। लंदन को जब 2012 के समर ओलंपिक आयोजित करने का मौका दिया गया था, उसके एक दिन बाद हुए थे। यह विस्फोट घरों में बनाए जाने वाले ऑर्गेनिक पैराऑक्साइड आधारित युक्तियों से बनाए गए थे, जिन्हें आत्मघाती हमलावरों ने अपनी पीठ पर पहन रखा था। 57 मिनट तक चले इन श्रृंखलाबद्ध हमलों में 52 नागरिकों की मौत हो गई थी और चार आत्मघाती हमलावर मारे गए थे, जबकि इन घटनाओं में 700 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

2006
इराक की सद्र सिटी में धमाके : इराक की सद्र सिटी में 23 नवंबर, 2006 को कार बमों के श्रृंखलाबद्ध विस्‍फोट हुए थे और दो मोर्टार हमले किए गए थे। यह बगदाद पर हुआ भीषण हमला था, जिसमें कम से कम 215 लोगों की मौत हो गई थी और 257 अन्य घायल हुए थे। इस हमले में शहर की शिया मुस्लिमों की झुग्गी बस्तियों को निशाना बनाया गया था। इन हमलों के बाद 24 घंटों के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया था। साथ ही, बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्‍डे को भी बंद कर दिया गया था। इन हमलों के जवाब में शिया मुस्लिमों ने छह सुन्नी अरबों को मिट्‍टी का तेल डालकर जिंदा जला दिया था। 

2006
मुंबई की ट्रेनों में बम विस्फोट : ग्यारह जुलाई, 2006 को मुंबई में सात सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे। मुंबई उपनगरीय ट्रेनों में हुए इन विस्फोटों में 209 लोगों की मौत हो गई थी और 714 अन्य घायल हुए थे। इन बमों को और अधिक घातक बनाने के लिए प्रेशर कुकरों रखा गया था और इन्हें प्रथम श्रेणी के डिब्बों में लगाया गया था। यह बम दोपहर के दौरान काम पर जाने वालों की भीड़ होने पर फटे। इन बम विस्फोटों को लश्कर ए तैयबा और स्टूडेंट्‍स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) ने किया था और दावा किया गया था कि गुजरात और कश्मीर में मुस्लिमों पर होने वाले कथित अत्याचारों का बदला लिया गया है।

कराची पर बम हमला : कराची पर बमों से हमला 18 अक्टूबर, 2007 को किया गया था। उस दिन पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो, दुबई और लंदन में अपने आठ वर्षीय आत्म निर्वासन को समाप्त कर स्वदेश लौटी थीं। ये विस्फोट एक मोटर काफिले पर किए गए थे जो कि एयरपोर्ट से मोहम्मद अली जिन्ना की मजार पर जा रहा था। इन बम विस्फोटों का असर पुलिस की तीन वैन पर हुआ जिसमें 20 पुलिसकर्मी मौके पर ही मारे गए थे। इनके अलावा, 139 लोगों की भी मौत हुई थी। इन लोगों में से ज्यादातर पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के कार्यकर्ता थे।  

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26/11 का मुंबई आतंकी हमला : 26 नवंबर, 2008 को पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने भारत की वाणिज्यक राजधानी मुंबई को अपना निशाना बनाया। लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादी समुद्री रास्ते से मुंबई में दाखिल हुए हुए थे। इस हमले में 160 से ज्यादा बेगुनाह लोगों की मौत हो गई, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए। हमले में कई विदेशी नागरिक भी मारे गए थे। शिवाजी टर्मिनस, चाबड़ हाउस पर हमले के साथ ही इन आतंकियों ने ताज होटल में भी लोगों को बंधक बना लिया था। इस हमले में जिंदा पकड़े गए एकमात्र आतंकवादी अजमल कसाब को को फांसी दे दी गई। 
2014
पेशावर आर्मी स्कूल पर हमला : 16 दिसंबर 2014 को आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान ने पाकिस्तान के पेशावर में एक आर्मी स्कूल में घुसकर गोलीबारी की। इसमें 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई। हमले के समय स्कूल 1500 के लगभग बच्चे मौजूद थे। छह आतंकवादी सुरक्षाबलों की वर्दी में घुसे थे। आतंकियों ने स्कूल में घुसने से पहले बाहर खड़ी गाड़ि‍यों को अपना निशाना बनाया, जबकि फायरिंग और धमाकों के कारण स्कूल की इमारत को भी भारी नुकसान हुआ।

2015
नवंबर में फ्रांस की राजधानी पेरिस में मुंबई के 26/11 जैसा आतंकी हमला हुआ। आतंकियों ने पहले लोगों को बंधक बनाया और फिर रेस्टोरेंट, फुटबॉल स्टेडियम जैसे पब्लिक प्लेस पर हमला किया। आठ आतंकियों ने 6 जगहों पर हमले किए जिसमें 128 लोगों की मौत हो गई है। हमला करने वाले आतंकी आईएसआईएस के स्लिपर सेल से थे।  


10 बड़े आतंकवादी संगठन, दहशत में दुनिया

दुनिया के सबसे खतरनाक और निर्दयी ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस आतंकी संगठन से मुकाबले के लिए अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों को मोर्चा संभालना पड़ा। आतंकी संगठन हमेशा दुनिया में खौफ पैदा करने के लिए आतंक का सहारा लेते रहे हैं। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलेगा कि अब तक करीब लाखों-करोड़ों निर्दोष लोगों की हत्या इन आतंकियों ने अकारण ही कर दी है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही आतंकवादी संगठनों के बारे में...




1. इस्लामिक स्टेट इन सीरिया एंड इराक (ISIS) : अबू बकर अल बगदादी द्वारा स्थापित आईएसआईस संगठन सीरिया और इराक में काफी सक्रिय है। इस संगठन का एकमात्र मकसद एशिया तक पहुंचकर पूरे विश्व का इस्लामीकरण करना है। वर्तमान में यह संगठन काफी सक्रिय है और काफी धनी भी है। इस संगठन का मूल उद्देश्य दुनियाभर में इस्लामीकरण को बढ़ावा देना और दुनिया के सभी देशों में शरिया कानून लागू करना है।


2. अल कायदा : दुनिया का पहला ऐसा संगठन है जिसने अपने आतंकवादियों को हाईटेक और टेकसेवी बनाया और आतंक की दुनिया में ऐसे उच्च शिक्षित पुरुषों और महिलाओं को आतंकवाद को फैलाने में लगाया जिनसे उम्मीद नहीं की जाती थी कि इतने पढ़े-लिखे और उच्च शिक्षा प्राप्त पेशेवर इस तरह का काम करेंगे। इतना ही नहीं, इन्होंने आत्मघाती बनने का रास्ता चुना। अल कायदा का गठन अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को न्यूयॉर्क के ट्‍विन टॉवर को धराशायी करने वाले आत्मघाती हमलावरों को तैयार के लिए किया गया था। घटना को अंजाम देने वाले आतंकी ओसामा बिन लादेन ने वर्ष 1988 में संगठन तैयार किया था।

दावा किया जाता है कि इस संगठन का अंत 2011 में अमेरिकी सेना ने ओसामा को पाकिस्तान के एबटाबाद में मारकर किया लेकिन मिस्र के अयमान-अल-जवाहिरी ने ओसामा की मौत के बाद इस संगठन को बनाए रखा। लेकिन सीरिया और इराक के गृहयुद्ध से उपजे पॉवर वैक्यूम ने अबू बकर अल बगदादी को एक नया संगठन खड़ा करने को प्रेरित किया और अल कायदा का एक बड़ा हिस्सा (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) के नाम से दुनिया के सामने आया। इसी संगठन के झंडे तले अल बगदादी ने इस्लामिक स्टेट (आईएस) नाम के खिलाफत की नींव डाली और उसने खुद को दुनियाभर के ‍मुस्लिमों का खलीफा (सर्वोच्च धर्मगुरु) घोषित किया।



3. तालिबान : 1994 में मुल्ला मोहम्मद उमर के नेतृत्व में इस संगठन का निर्माण हुआ। इस आतंकी संगठन का एकमात्र मकसद पूरे अफगानिस्तान में इस्लामी कानून को मनवाना था। इसमें यह संगठन काफी हद तक सफल भी रहा लेकिन अमेरिकी सैनिकों ने इस संगठन को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया। हालांकि यह संगठन फिर से अफगानिस्तान में पनपने के लिए हाथ-पैर मार रहा है।

4. लश्कर-ए-तैयबा : पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा मुंबई हमले के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसके आतंकवादियों ने मुंबई में 2006 में आतंकी हमला कर 166 लोगों की जान ले ली थी। इस संगठन का मुख्य काम भारत में आतंकी गतिविधियां फैलाना है। यह पूरे पाकिस्तान में मानवीय हितों की रक्षा करने वाले संगठन के नाम से जाना जाता है। इसके आतंकियों को पाकिस्तानी सेना और आईएसआई का संरक्षण हासिल है।

al Qaeda

5. बोको हराम : बोको हराम नाइजीरिया का प्रमुख इस्लामी आतंकी संगठन है। इसका एकमात्र मकसद पूरे नाइजीर‍िया में इस्लामीकरण को बढ़ावा देना है। इस संगठन के अनुसार- ‘पश्चिमी शिक्षा हराम है।’ जो भी इस संगठन के खिलाफ जाता है, उसे ये मारते हैं और जला भी देते हैं। बर्बरताओं और हत्याओं के मामले में यह आईएसआईएस से भी आगे है।

6. पाकिस्तानी तालिबान : पाकिस्तान के पेशावर में आर्मी स्कूल के 132 बच्चों सहित 148 लोगों की हत्या करने वाला आतंकवादी संगठन है। इसे बहुत खतरनाक संगठनों में गिना जाता है। यह आतंकी संगठन दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठनों में से एक माना जाता है। पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा की हिमायती मलाला यूसुफजयी को गोली से मारने के लिए इसी के आतंकियों को जिम्मेदार माना जाता है।

7. अल-नुसरा फ्रंट : अल-नुसरा फ्रंट को सीरिया में अल कायदा के नाम से जाना जाता है। पूरे विश्व के इस्लामीकरण के पक्ष में सक्रिय यह संगठन काफी खतरनाक है। पश्चिमी देशों के साथ इस संगठन का विरोध अक्सर देखा जा सकता है और इसे इसराइल के कट्‍टर शत्रुओं में गिना जाता है।



8. जेमाह इस्लामिया : जेमाह इस्लामिया दक्षिण-पूर्व एशिया में अल कायदा की एक शाखा है। इस संगठन ने 2002 में बाली में विस्फोट किया था जिसकी वजह से 202 लोगों की जानें गई थीं।

9. अल कायदा इन अरेबियन पेनिनसुला : वर्ष 2006 में कई आतंकवादी गुटों का यमन में विलय होने के बाद इस संगठन का अस्तित्व सबके सामने आया। यह संगठन यमन में काफी सक्रिय है और वहां पूरी शिक्षा पद्धति, रहन-सहन को बदलने की कोशिश कर रहा है। पूरा आतंकी संगठन इस बात का ध्यान देता है कि आने वाली पीढ़ी केवल इस्लामी रिवाजों को माने।



10. अबू सय्याफ : अबू सय्याफ दक्षिण-पूर्व एशिया में फिल‍ीपीन्स देश का एक आतंकी संगठन है। इस संगठन का काम लोगों को लूटना है। फिल‍ीपीन्स के सल्लू टापू और तटवर्ती पानी में अपहरण और फिरौती करके इसके सदस्य अपना खर्चा चलाते हैं।

योगीजी की सेना हिन्दु युवा वाहिनी




























Thursday, 25 February 2016

भारत वर्ष के अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान





एक विशेष श्रंखला जिसका उद्देश्य पृथ्वीराज चौहान के विराट और महान व्यक्तित्व को सही ढंग से प्रस्तुत करना है।

पृथ्वीराज चौहान भारतीय इतिहास का एक ऐसा चेहरा है जिसके साथ वामपंथी और धर्मनिरपेक्ष इतिहासकारों ने सबसे ज्यादा ज्यादती की है। पृथ्वीराज जैसे महान और निर्भीक योद्धा, स्वाभिमानी युगपुरुष, अंतिम हिन्दू सम्राट, तत्कालीन भारतवर्ष के सबसे शक्तिशाली एवं प्रतापी राजा को इतिहासकारों ने इतिहास में बमुश्किल आधा पन्ना दिया है और उसमे भी मोहम्मद गौरी के हाथों हुयी उसकी हार को ज्यादा प्रमुखता दी गयी है। 

विसंगतियों से भरे पडे भारतीय इतिहास में विदेशी, विधर्मी, आततायी, मलेच्छ अकबर महान हो गया और पृथ्वीराज गौण हो गया। विडंबना देखिये आज पृथ्वीराज पर एक भी प्रामाणिक पुस्तक उपलब्ध नहीं है। महान पृथ्वीराज का इतिहास आज किंवदंतियों से भरा पड़ा है। जितने मुँह उतनी बात। जितने लेखक उतने प्रसंग। तमाम लेखकों ने सुनी सुनाई बातों या पुराने लेखकों को पढ़कर बिना किसी सटीक शोध के पृथ्वीराज चौहान पर पुस्तकें लिखी हैं। जन सामान्य में पृथ्वीराज चौहान के बारे में उपलब्ध अधिकांश जानकारी या तो भ्रामक है या गलत। आधी अधूरी जानकारी के साथ ही हम पृथ्वीराज चौहान जैसे विशाल व्यक्तित्व, अंतिम हिन्दू सम्राट, पिछले १०००  साल के सबसे प्रभावशाली, विस्तारवादी, महत्वकांक्षी, महान राजपूत योद्धा का आकलन करते हैं जो सर्वथा अनुचित है।

पृथ्वीराज चौहान के जन्म से लेकर मरण तक इतिहास में कुछ भी प्रमाणित नहीं मिलता। विराट भारत वर्ष के उससे भी विराट इतिहास का पृथ्वीराज एक अकेला ऐसा महा नायक जिसके जीवन की हर छोटी बड़ी गाथा के साथ तमाम सच्ची झूटी किद्वदन्तिया और कहानियां जुडी हुयी हैं। इस नायक की जन्म तिथि ११४९  से लेकर ६५ , ६६ , ६९  तक मिलती है। इसी तरह मरने को लेकर भी तमाम कपोल कल्पित कल्पनायें हैं। कोई कहता है कि अजमेर में मृत्यु हुयी तो कोई कहता है अफ़ग़ानिस्तान में, कोई कहता है मरने से पहले पृथ्वीराज ने मोहम्मद गोरी को मार दिया था तो कोई कहता है गोरी पृथ्वीराज के बाद भी लम्बे समय तक जीवित रहा। पृथ्वीराज और मोहम्मद गोरी के युद्धों की संख्या से लेकर उनके युद्धों के परिणामों तक, पृथ्वीराज को दिल्ली की गद्दी मिलने से लेकर अनंगपाल तोमर या तोमरों से उसके रिश्तों तक सब जगह भ्रान्ति है । यही नहीं पृथ्वीराज और जयचंद के संबंधों की बात करें या पृथ्वीराज-संयोगिता प्रकरण की कहीं भी कुछ भी प्रामाणिक नहीं। पृथ्वीराज के विवाह से लेकर उसकी पत्नियों तथा प्रेम प्रसंगों तक, हर विषय पर दुविधा और भ्रान्ति मिलती है। पृथ्वीराज से जुड़े तमाम किस्से कहानियां जो आज अत्यंत प्रासंगिक और सत्य लगते हैं इतिहास की कसौटी पर कसने और शोध करने पर उनकी प्रमाणिकता ही खतरे में पड़ जाती है। इनमे सबसे प्रमुख है पृथ्वीराज और जैचंद के सम्बन्ध। इतिहास में इस बात के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिलते कि गौरी को जैचंद ने बुलाया था या उसने पृथ्वीराज के खिलाफ गौरी का साथ दिया था क्यूंकि किंवदंतियों तथा चारणों के इतिहास में इस बात की प्रमुख वजह पृथ्वीराज द्वारा संयोगिता का बलात हरण करना बताया गया है जबकि इतिहास में कहीं भी प्रामाणिक तौर पर संयोगिता का जिक्र ही नहीं मिलता। जब संयोगिता ही संदिग्ध है तो संयोगिता की वजह से दुश्मनी कैसे हो सकती है।

हाँ लेकिन इतना तय है कि पृथ्वीराज और जैचंद के सम्बन्ध मधुर नहीं थे और शायद अत्यंत कटु थे। लेकिन इसकी वजह उनकी आपसी प्रतिस्पृधा तथा महत्वकांक्षाओं का टकराव था। यह बात दीगर है कि पृथ्वीराज चौहान उस समय का सबसे शक्तिशाली एवं महत्वकांक्षी राजा था। जिस तेजी से वो सबका कुचलता हुआ हराता हुआ अपने साम्राज्य का विस्तार कर रहा था वो तत्कालीन भारतवर्ष के प्रत्येक राजवंश के लिये खतरे की घंण्टी थी। पृथ्वीराज तत्कालीन उत्तर और पश्चिम भारत के सभी छोटे बड़े राजाओं को हरा चूका था इनमे सबसे प्रमुख गुजरात के भीमदेव सोलंकी तथा उत्त्तर प्रदेश के महोबा के चंदेल राजा परिमर्दिदेव को हरा चूका था जिसके पास बनाफर वंश के आल्हा उदल जैसे प्रख्यात सेनापति थे। मोहम्मद गोरी के कई आक्रमणों को उसके सामंत निष्फल कर चुके थे।




ये पृथ्वीराज चौहान ही था जिसके घोषित राज्य से बड़ा उसका अघोषित राज्य था। जिसका प्रभाव आधे से ज्यादा हिंदुस्तान में था और जिसकी धमक फारस की खाड़ी से लेकर ईरान तक थी। जो १२  शताब्दी के अंतिम पड़ाव के भारत वर्ष का सबसे शक्तिशाली सम्राट और प्रख्यात योद्धा था जो जम्मू और पंजाब को भी जीत चुका था। गुजरात के सोलंकियों, उज्जैन के परमारों तथा महोबा के चन्देलों को हराने के बाद बड़े राजाओं तथा राजवंशों में सिर्फ कन्नौज के गहड़वाल ही बचे थे जिन्हे चौहान को हराना था और उस समय की परिस्थितियों का अवलोकन करने तथा पृथ्वीराज के शौर्य का अवलोकन करने के बाद यह कहना कतई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि पृथ्वीराज चौहान, जैचंद गहड़वाल को आसानी से हरा देता। 

राजपूत काल के प्रारम्भ (७ वीं सदी ) से राजतन्त्र की समाप्ति तक (१९४७) पूरे राजपूत इतिहास में कोई भी राजपूत राजा पृथ्वीराज के समक्ष शक्तिशाली, महत्वकांक्षी नहीं दिखता है। अधिकांश राजा या तो अपने राज्य के लिये मुसलमानों से लड़ते रहे या उनके पिछलग्गू बने रहे। एक भी राजा ऐसा पैदा नहीं हुआ जिसने इतनी महत्वकांक्षा दिखायी हो इतना सामर्थ दिखाया हो जो आगे बढ़कर किसी इस्लामिक आक्रांता को ललकार सका हो, चुनौती दे सका हो, जिसने कभी दिल्ली के शासन पर बैठने की इच्छा रखी हो (अपवादस्वरूप राणा सांगा का नाम ले सकते हैं)। 

लेखक : सचिन सिंह गौड़

Wednesday, 24 February 2016

કાઠિયાવાડનો રોટલો

કાઠીયાવાડ માં તું કોક’દી ભૂલો પડને ભગવાન,
તું થા ને મારો મોંઘેરો મહેમાન, તને સ્વર્ગ રે ભુલાવું મારા શામળા…



સાંભળો મિત્રો કે,,,
કાઠિયાવાડ નો રોટલો કેવો હોય ?
ભાવનગર પંથકનો બાજરો હોય.,,
કોળિયાક ગામ નાં દેરડી(કુંભાજી) ની ઘંટી હોય,,,
ખડસલિયા ગામના કુંભારે બનાવેલી તાવડી હોય,,,
અને એમાય હાથબ ગામની બાયુએ મધરાતે ઊઠીને મુઠ્ઠીએ મુઠ્ઠીએ ઘંટીમાં નાખીને પ્રભાતિયાંના સૂરે ગાતાં ગાતાં દળ્યો હોય...
ઈમાંથી ધોબેક લોટ લઈ માટીની કાળી રીઢી કથરોટમાં નાખ્યો હોય,,,
પડખે છાલિયામાં ઓગાળેલા વડાગરા મીઠાનું પાણી લઈ લોટનો પીંડો બાંધ્યો હોય,,,
અને મા જેમ પહેલાં ખોળાના બાળકને હેતથી હુલાવતી હોય એમ પીંડાને બે હાથમાં લઈ રમાડતા રમાડતા રોટલો ઘડયો હોય,,,
અને તાવડીમાં નાખી ત્રાંબિયા જેવો શેડવ્યો હોય,,,
પછી ઈની કોપટી કાઢીને તાવણ્ય મૂકી હોય,,,
તો ત્રણ ત્રણ ઘર્યે જેની ફોરમ જાય ઈ નવચાંદરી ભેંસનું નખમાં ફાંહુ વાગે એવું ઘી ભર્યું હોય,,,
અમારા કાઠિયાવાડની વાડીના કાંટાળા રીંગણાનું ભડથું અને ગિરની દેશી ગાયના શેડકઢા દૂધની તાંહળી ભરીને મૂકી દીધી હોય,,,
ભગવાન ભોળિયો નાથ ત્યાંથી નીકળ્યો હોય ને બાવડું ઝાલીને ભોજનના ભર્યા થાળ માથે બેસાડી દીધો હોય,,,
તો એના બત્રીસે કોઠે આનંદના દીવડા પ્રગટી જાય.
ઈ ન્યા બેઠો બેઠો મા પાર્વતિજી ને સંદેશો કહેવરાવી દે કે "આપણને તો ભાઈ કાઠિયાવાડની ધરતી માથે ફાવી ગયું છે...
તમને મારા વિના ન્યાં કૈલાસ માં અણહરું લાગે તો તમે ય આંય વિયા આવો"...
આવો હોય કાઠિયાવાડનો રોટલો ભાઈ~ભાઈ...


અમથું કાઁઈ અમારુ કાઠિયાવાડ જગ આખા માં આટલું નથી વખણાતું હો મિત્રો,,,
આપ પણ કદિ ભૂલા પડો અને માણો અમારા કાઠિયાવાડ નાંરોટલા નો રસસ્વાદ..

ગાયત્રી આશ્રમ ધર્મોત્સવ - ગધેથડ (પૂજ્ય શ્રી લાલદાસ બાપુ)

ર૦ લાખ ભાવિકોએ મહાપ્રસાદ લીધોઃ પર ગામોમાં ગૌમાતાને ઘાસચારો-શ્વાનોને લાડુ-કિડીને કિડીયારૂ- પશુ-પક્ષીઓને દરરોજ ઘાસચારો-ચણનું વિતરણઃ પૂ.લાલબાપુના અર્શિવચન સાથે ધર્મોત્સવ પૂર્ણ થયો ગધેથડ ગાયત્રી આશ્રમનો ધર્મોત્સવ વિશ્વ રેકોર્ડમાં સ્થાન પામશે.
  

 ઉપલેટાના ગધેથડ ગાયત્રી આશ્રમના પૂ.મહંતશ્રી લાલદાસ બાપુ ના સાનિધ્ય માં શ્રી મગનલાલ શાસ્ત્રીના સ્વમુખે યોજાયેલ વિશ્વ કલ્યાણર્થે ધર્મોસ્તવ તા.૧૦ થી ર૩ સુધીના ધર્મોત્‍સવમાં ૩૦ થી ૩પ લાખ ભકતોએ હાજરી આપી ધન્યતા અનુભવી છે. સાથે-સાથે પપ૧ કુંડી ગાયત્રી મહાયજ્ઞ યોજાતા સમગ્ર ગધેથડ પંથકમાં દિવ્ય વાતાવરણ ઉભુ થયુ અને ૭ દિવસીય શ્રીમદ્દ ભાગવત જ્ઞાનયજ્ઞ સપ્તાહ - સર્વરોગ નિદાન કેમ્પ સાથે દવા પણ વિના મુલ્યે રકતદાન કેમ્પ - ભવ્ય  લોકડાયરા-સંતવાણી, સાંસ્‍કૃતિક કાર્યક્રમો-આનંદ મેળા-કૃષિ મેળાઓ યોજાયા જેમાં અંદાજે ૩૦ થી ૩પ લાખ ભાવિક ભકતજનોએ લાભ લીધો હતો.
   ગધેથડ ભુમિને પાવન કરનાર પૂ.લાલદાસબાપુ તથા રાજુ ભગતે માં ભગવતી શ્રી ગાયત્રીના સાનિધ્ય માં ૧૭ વર્ષ સુધી નાના-મોટા અનેક અનુસ્થાનો કરવા માં આવેલ છે. 
  આ તકે ૭ દિવસીય વિશ્વ કલ્યાણર્થે ધર્મોસ્તવ માં લાખો લોકોની સાથે પશુ-પક્ષીઓ-કિડીઓને ભોજન આપી સમગ્ર ભારતમાં આ પ્રથમ ઉત્સવ હશે કે જયાં માનવોનું તો ધ્યાન રખાયું પરંતુ પક્ષીઓને ચણ, કીડીઓને કીડીયારૂ અને પશુઓને ઘાસ અને કુતરાઓને લાડુ આપી માનવતા નું ભગવદ કાર્ય થયું છે. 
ક્રિકેટર રવીન્દ્ર જાડેજા 


   સર્વરોગ નિદાન કેમ્પ અને નિઃશુલ્‍ક દવા વિતરણ માં તા. ર૭-રના રોજ ર૩પ૦ દર્દીઓ સાથે સાત દિવસમાં કુલ ૧૬પપ૬ દર્દીઓઓએ નિદાન કેમ્પ નો લાભ લીધો હતો અને નિઃશુલ્‍ક દવા અંદાજીત સવા કરોડ જેવા દર્દીઓને વિનામૂલ્‍યે આપવામાં આવી છે. સર્વરોગ નિદાન કેમ્પ  દ્વારા દૂર દુરથી લોકો ઉપસ્‍થિત રહી પોતાનું નિદાન કરી સાથે દવા પણ આપવામાં આવી છે. આ કેમ્‍પમાં રાજકોટ, જામનગર, અમદાવાદ, ઉપલેટા, પોરબંદર, વડોદરા સહિત અન્‍ય શહેરોમાંથી નામી ડોકટરો, નર્સો સહિત સ્‍ટાફ ખડેપગે રહી નિસ્‍વાર્થ ભાવે પોતાની સેવા બજાવી હતી તેમજ કેમ્‍પમાં સ્‍વયંમ સેવકોની સેવા પણ નોંધનીય હતી આ તકે પ.પૂ. લાલબાપુ આજે સેવા આપનાર તમામ ડોકટર તથા સ્‍ટાફને શીલ્‍ડ અને સન્‍માન પત્ર આપી સન્‍માનીત કર્યા હતા. કેમ્‍પમાં જુદા જુદા ર૪૦ ડોકટરોએ સેવા આપી હતી.
   મંગળવારે કથામાં છેલ્લા દિવસે સુદામા ચરિત્રનું વર્ણન આબેહૂબ કરતા કલાકારોએ લોકોને મંત્રમુગ્‍ધ કરી દીધા હતા. પ.પૂ. લાલબાપુ, રાજુભગત, દોલુભગત અને ગરીબ દાસ ભગત કથામાં પધારેલ અને સુદામા ચરિત્રનું વર્ણનનો લાભ લીધો હતો. વિશ્વ કલ્‍યાણર્થ યોજાવામાં આવેલ શ્રીમદ્‌્‌ ભાગવત જ્ઞાનયજ્ઞ કથાની ભવ્‍યાતિ ભવ્‍ય પૂણાહૂતિ કરવામાં આવી હતી ભજન ભોજન અને ભકિતનો ત્રિવેણી સંગમના ધર્મોત્‍સવમાં અંદાજીત ૩૩ લાખ ભકતોએ મા ગાયત્રી માતાજીના દર્શન અને પ.પૂ. લાલબાપુના આશિર્વાદ અને પપ૧ કુંડી મહાગાયત્રી યજ્ઞના દર્શન તથા વિશ્વ કલ્‍યાર્થ યોજાયેલ કથા શ્રવણમાં લાખો લોકોએ લાભ લઇ ધન્‍યતા અનુભવી હતી. ગાયત્રી આશ્રમ ખાતે વિવિધ ધર્મોત્‍સવની અને કથાની પૂણાહૂતિ કરવામાં આવી હતી. 
અનિરૂદ્ધસિંહ (રીબડા) પુ બાપુ સાથે

   ગધેથડ ગાયત્રી આશ્રમે ડે. કલેક્‍ટર સ્‍વ. પંકજસિંહજી  જાડેજા પરિવારના  સ્‍મરણાર્થે યોજાયેલ સર્વરોગ નિદાન કેમ્‍પમાં ૩૩૪૪ લોકોનું નિદાન
    સર્વજન સુખાય ના હેતુથી પરમ પૂજય સંતશ્રી લાલબાપૂના દિવ્‍ય આશીષથી તેમજ પૂજય રાજુભગત અને પૂજય દોલુભગતના સહયોગથી ઉપલેટા તાલુકાના ગદ્યેથડ ગાયત્રી આશ્રમમાં તા. ૧૭/૦૨/૨૦૧૬ થી તા. ૨૩/૦૨/૨૦૧૬ સુધી વિશ્‍વ કલ્‍યાણ અર્થે યોજાયેલ ૫૫૧ કુંડી ગાયત્રી મહાયજ્ઞ તેમજ શ્રીમદ ભાગવત કથા મહોત્‍સવ દરમ્‍યાન તા. ૨૧/૦૨/૨૦૧૬ ને રવિવારનાં રોજ તાજેતરમાં માર્ગ અકસ્‍માતમાં નિદ્યન પામેલાં કર્તવ્‍યનિષ્‍ઠ ડે. કલેકટર સ્‍વ. શ્રી પંકજસિંહજી જાડેજા, તેમના દ્યર્મપત્‍ની સ્‍વ. શ્રીમતી રાજેશ્‍વરીબા અને તેમના સંતાનો સ્‍વ. કુ. રીષીતાબા અને સ્‍વ.  હર્ષવર્ધનસિંહના સ્‍મરણાર્થે સર્વરોગ નિદાન કેમ્‍પ યોજવામાં આવેલ. આ નિદાન કેમ્‍પમાં જામનગરની વિશ્વ વિખ્‍યાત ગુજરાત આયુર્વેદ યુનિવર્સિટીના પીજીટી વિભાગના કુલ-૧૫ ડોકટરોની ટીમ તેમજ પોરબંદર ખાતેથી ભાવસિંહજી સરકારી હોસ્‍પીટલ તેમજ પોરબંદર શહેરના અન્‍ય નામાંકિત તબીબોની કુલ-૨૬ જણાંની ટીમે આ કેમ્‍પમાં સેવા આપેલ હતી. આ નિદાન કેમ્‍પમાં આયુર્વેદ તેમજ એલોપેથીના હદયરોગ, આંખ-કાન-ગળાના રોગો, સ્‍ત્રીરોગો, બાળરોગ વિગેરે વિભાગોમાં કુલ-૩૩૪૪ લોકોના નિદાન કરાયા હતાં અને આ સર્વે લોકોને ગુજરાત આયુર્વેદ યુનિવર્સિટી તેમજ અન્‍ય દાતાઓના સહયોગથી નિઃશુલ્‍ક દવાઓનું વિતરણ પણ કરવામાં આવેલ.  દિપ પ્રાગટય કરીને આ નિદાન કેમ્‍પની શરુઆત કરવામાં આવેલ હતી. તેમાં પરમ પૂજય લાલબાપૂના આર્શીવચન મળેલાં હતાં. આ સમગ્ર કેમ્‍પમાં આઇ.પી.જી.ટી. એન્‍ડ આર.એ., ગુજરાત આયુર્વેદ યુનિવર્સિટી, જામનગરના ડાયરેકટરશ્રી ડો. પી. કે. પ્રજાપતિ, ડીન ડો. કલ્‍પનાબેન પટેલ, સિન્‍ડીકેટ મેમ્‍બર ડો. ડી. બી. વાઘેલા, ડો. ભૂપેશ પટેલ, પોરબંદરના ભૂતપૂર્વ સિવિલ સર્જન ડો. એન. યુ. જાડેજા, ડો. પારવાણી, ડો. અશોક ગોહેલ, ભાવસિંહજી સિવિલ હોસ્‍પીટલ, પોરબંદરના ડો. ગઢવી, ડો. સિઘ્‍દ્યાર્થસિંહ જાડેજા વિગેરેએ સમગ્ર દિવસ દરમ્‍યાન ઉપસ્‍થીત રહીને તેમની અનન્‍ય સેવા આપેલ હતી.  આ નિદાન કેમ્‍પની રાજયના કેબીનેટ મંત્રી  ભૂપેન્‍દ્રસિંહ ચુડાસમા, સતાધારની જગ્‍યાના મહંત વિજયબાપૂ, ઉપલેટા વિસ્‍તારના દ્યારાસભ્‍ય પ્રવિણભાઇ માકડીયા, આઇ.પી.એસ. ડો. પાર્થરાજસિંહ ગોહિલ તેમજ ઉચ્‍ચ અદ્યિકારીઓએ મુલાકાત લઇને સદગતોની શ્રઘ્‍દ્યાંજલિ રુપે કરવામાં આવેલ સેવાકાર્યને બિરદાવે.લ હતું. કેમ્‍પમાં  દિલીપભાઇ રાડીયા, હરપાલસિંહ જાડેજા,  હકુભા વાળા, નિલેશભાઇ માખેચા,  અશોકસિંહ જાડેજા,  અતુલભાઇ ચગ વિગરે સ્‍વયંસેવકોએ ખૂબજ જહેમત ઉઠાવી હતી.