Saturday, 27 February 2016

हिंदू धर्म का अपमान करने के आरोप में ओवैसी की पार्टी का नेता गिरफ्तार

वैसे तो हमारे देश में हर धर्म को सम्मान दिया जाता है किंतु कई बार ऐसा होता है कि कुछ लोग हिंदू धर्म का सरेआम मजाक उड़ा कर अपनी पार्टी के लिए वोटो का बंदोबस्त कर लेते हैं। ऐसा ही कुछ करने की कोशिश की थी हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए -इत्तेहादुल मुस्लिम मीन ने जो फिर से एक बार विवादों में आ गई है।
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इस पार्टी के स्थानीय अध्यक्ष ने हिंदुओं के विरुद्ध नारेबाजी की और मेरठ के MIM  अध्यक्ष डा वलीउर रहमान को आज सुबह पुलिस उठा कर ले गई। उन पर संगीन आरोप है कि उन्होंने हिंदू भावना को ठेस पहुंचाने की कोशिश की और हिंदू धर्म के विरुद्ध नारेबाजी की इस बात की पुष्टिकरण हो गई है की हाल ही में सरधना इलाके में हिंदू धर्म के विरुद्ध कुछ नारेबाजी हुई थी।
इसी कारण वहां माहौल भी बड़ा तनाव पूर्ण हो गया था और उस इलाके में माहौल कुछ ऐसा हो गया था की धारा 144 लागू करनी पड़ी। पुलिस ने भी अच्छे से कार्यवाही करते हुए माहौल को संभाला पुलिस ने psc जवानों के साथ मिलकर बृजेश कुमार के नेतृत्व में शरारती तत्वों को पकड़ने के लिए सूचना अनुसार घर-घर में छापामारी की, किंतु छापामारी के बावजूद भी कुछ शरारती तत्वों को पकड़ा नहीं जा सका। पुलिस ने उन सब के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया पर वो  सब लोग अभी फरार हैं।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के नगर अध्यक्ष डॉ वलीउर रहमान, जाट आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के तहसील अध्यक्ष अमित गौतम, तहसील महासचिव गौरव और अनेक अज्ञात व्यक्तियों पर मुकदमा दर्ज हुआ।
इसी विषय पर विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने मिलकर विधायक संगीत सौम के आवास पर बैठक की। विभाग संगठन मंत्री सुदर्शन व विभाग छात्र प्रमुख मिलन सौम के नेतृत्व में नारेबाजी करते हुए थाने पहुंचे और अपनी नाराजगी प्रकट की।
हिंदू स्वाभिमान संस्था के पदाधिकारियों ने भी कल हिंदू विरोधी नारे लगाने वालों के विरोध में पुलिस आफिस पर प्रदर्शन किया
यह भी कहा जा रहा है कि हिंदू विरोधी नारे लगाना इस आयोजन में पहले से ही तय था और हिंदू धर्म मुर्दाबाद लिखी तख्ती पहले से ही मोहल्ला  भाटवाडा के अंबेडकर भवन में तैयार की गई थी।
MIM  अध्यक्ष डॉ वलीउर रहमान ने इस बात की जानकारी होने से इनकार किया था किंतु उनका यह झूठ पकड़ा गया जब इस बात की पुष्टि हुई की हिंदू धर्म मुर्दाबाद लिखी तख्ती काफी देर तक उन्होंने खुद पकड़ रखी थी ।
इस प्रदर्शन में बच्चों को भी लालच देकर शामिल किया गया था और वीडियो में साफ दिखाई देता है वह देवी मंदिर पर भी प्रदर्शन में शामिल थे।

सिंहस्थ महा कुम्भ : उज्जैन

'सिंहस्थ माहात्म्य' नामक ग्रन्थ में ऐसा उल्लेख आया है कि समुद्र-मंथन के बाद देवासुर संग्राम के कारण देवों ने अमृत-कुम्भ को दानवों से बचाने की जो दौड़-धूप की, उसके कारण हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन में कुछ अमृत बिन्दु जा गिरे।
प्रति बारह वर्ष इस घटना की स्मृति में इन स्थानों पर कुम्भ पर्व का आयोजन होता है।उज्जैन के कुम्भ पर्व की विशेषता यह है कि यहाँ कुम्भ एवं सिंहस्थ दोनों पर्व एक साथ आते हैं। इस पर्व पर दस पवित्र योग एकत्रित होते हैं -
1 मेष राशि पर सूर्य,
2 सिंह राशि पर बृहस्पति,
3 वैशाख मास,
4 शुक्ल पक्ष,
5 पूर्णिमा,
6 तुला राशि पर चन्द्रमा,
7 स्वाति नक्षत्र,
8 व्यतिपात का योग,
9 सोमवार एवं
10 मोक्षदायक अवन्ती क्षेत्र।
सिंहस्थ के इस पुनीत पर्व पर देश-विदेश के यात्री-गण लाखों की संख्या में स्नानार्थ आते हैं और धर्म के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। विशेष रूप से दर्शनीय साधु-महात्माओं का स्नान को जाता हुआ जुलूस होता है। साधु-लोग सिंहस्थ की अवधि में उज्जैन में निवास करते हैं और स्नान की तिथियों पर बड़े धूमधाम से अपनी निशानों सहित शिप्रा-स्नान करते हैं।
सिंहस्थ पर्व के इस पावन अवसर पर प्रत्येक यात्री एवं स्नानार्थी महाकालेश्वर के दर्शन करता है। उस समय महाकाल मन्दिर की छटा अद्भुत होती है। सारी व्यवस्थाएँ बड़ी सुनियोजित और चौकन्नी होती है। सारा वातावरण महाकालेश्वर की जय जयकार से युक्त हो जाता है।

** शिव को इसलिए कहते हैं महाकाल **


अकाल मृत्यु वो मरे, जो काम करे चण्डाल का।
काल उसका क्या करे, जो भक्त हो महाकाल का॥



स्कंदपुराण के अवंती खंड, शिव महापुराण, मत्स्य पुराण आदि में महाकाल वन का वर्णन मिलता है। शिव महापुराण की उत्तराद्र्ध के 22वे अध्याय के अनुसार दूषण नामक एक दैत्य से भक्तों की रक्षा करने के लिए भगवान शिव ज्योति के रूप में यहां प्रकट हुए थे। दूषण संसार का काल थे और शिव ने उसे नष्ट किया अत: वे महाकाल के नाम से पूज्य हुए। तत्कालीन राजा राजा चंद्रसेन के युग में यहां एक मंदिर भी बनाया गया, जो महाकाल का पहला मंदिर था। महाकाल का वास होने से पुरातन साहित्य में उज्जैन को महाकालपुरम भी कहा गया है।

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ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर कई कारणों से अलग हैं। महाकाल के दर्शन से कई परेशानियों से मुक्ति मिलती है। खासतौर पर महाकाल के दर्शन के बाद मृत्यु का भय दूर हो जाता है क्योंकि महाकाल को काल का अधिपति माना गया है।
सभी देवताओं में भगवान शिव ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनका पूजन लिंग रूप में भी किया जाता है। भारत में विभिन्न स्थानों पर भगवान शिव के प्रमुख 12 शिवलिंग स्थापित हैं। इनकी महिमा का वर्णन अनेक धर्म ग्रंथों में लिखा है। इनकी महिमा को देखते हुए ही इन्हें ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है। यूं तो इन सभी ज्योतिर्लिंगों का अपना अलग महत्व है लेकिन इन सभी में उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का विशेष स्थान है। धर्म ग्रंथों के अनुसार-

आकाशे तारकेलिंगम्, पाताले हाटकेश्वरम्

मृत्युलोके महाकालम्, त्रयलिंगम् नमोस्तुते।।
यानी आकाश में तारक लिंग, पाताल में हाटकेश्वर लिंग और पृथ्वी पर महाकालेश्वर से बढ़कर अन्य कोई ज्योतिर्लिंग नहीं है। इसलिए महाकालेश्वर को पृथ्वी का अधिपति भी माना जाता है अर्थात वे ही संपूर्ण पृथ्वी के एकमात्र राजा हैं।


एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग


महाकालेश्वर की एक और खास बात यह भी है कि सभी प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र महाकालेश्वर ही दक्षिणमुखी हैं अर्थात इनकी मुख दक्षिण की ओर है। धर्म शास्त्रों के अनुसार दक्षिण दिशा के स्वामी स्वयं भगवान यमराज हैं। इसलिए यह भी मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से भगवान महाकालेश्वर के दर्शन पूजन करता है उसे मृत्यु उपरांत यमराज द्वारा दी जाने वाली यातनाओं से मुक्ति मिल जाती है।
संपूर्ण विश्व में महाकालेश्वर ही एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहां भगवान शिव की भस्मारती की जाती है। भस्मारती को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं। मान्यता है कि प्राचीन काल में मुर्दे की भस्म से भगवान महाकालेश्वर की भस्मारती की जाती थी लेकिन कालांतर में यह प्रथा समाप्त हो गई और वर्तमान में गाय के गोबर से बने उपलों(कंडों) की भस्म से महाकाल की भस्मारती की जाती है। यह आरती सूर्योदय से पूर्व सुबह 4 बजे की जाती है। जिसमें भगवान को स्नान के बाद भस्म चढ़ाई जाती है।