Wednesday, 21 January 2015

पहले ब्लैकमनी लाओ, नामों में दिलचस्पी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसकी दिलचस्पी ब्लैकमनी के देश में वापस आने में है, ना कि नामों के खुलासे में। मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता राम जेठमलानी ने कहा कि ब्लैक मनी वापस लाए जाने के लिए कानून में बदलाव से संबंधित ड्राफ्ट उन्होंने सरकार को भेजे हैं, लेकिन इस पर कोई जवाब नहीं मिला है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कई नामों का खुलासा करने को कहा गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम देश में ब्लैकमनी वापस लाना चाहते हैं, हमारी दिलचस्पी नामों के खुलासे में नहीं है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि नामों के खुलासे के लिए एसआईटी से आग्रह किया जा सकता है।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता राम जेठमलानी की ओर से पेश सीनियर ऐडवोकेट अनिल दीवान ने दलील दी कि अभी तक सरकार एक भी रुपया वापस नहीं ला पाई है। इस मामले में जिनके अकाउंट विदेश में हैं, उन अकाउंट्स को फ्रीज किया जाना चाहिए। जिस अकाउंट के बारे में छानबीन चल रही है, उनके बारे में जानकारी दी जानी चाहिए।


इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल ने कहा कि 31 मार्च 2015 तक तमाम अकाउंट का असेस्मेंट कर लिया जाएगा और तमाम नामों की लिस्ट एसआईटी के पास है। केंद्र सरकार ने तमाम जानकारियां एसआईटी को दे दी हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता या फिर इस मामले में अन्य पक्ष चाहें तो अपना सुझाव एसआईटी के सामने दे सकते हैं। नामों का खुलासा करने के मामले में एसआईटी फैसला करेगी। इस दौरान ऐडवोकेट प्रशांत भूषण ने भी कहा कि जो भी अवैध अकाउंट हैं, उनका खुलासा किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा है कि वह दो हफ्ते में अपने सुझाव एसआईटी के सामने पेश करें। साथ ही कोर्ट ने कहा कि इन सुझावों पर एसआईटी विचार करने के बाद कानूनी तौर पर अपना फैसला ले और इसके बाद एसआईटी अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करे।


काले धन पर कानून बनाने में देर कर रही है मोदी सरकार: राम जेठमलानी

सीनियर ऐडवोकेट राम जेठमलानी ने इस बात पर निराशा जताई है कि ब्लैक मनी पर अंकुश के लिए जिस कानून का प्रस्ताव उन्होंने दिया था, उसे लाने में मोदी सरकार देर कर रही है। जेठमलानी ने सुप्रीम कोर्ट में काले धन से जुड़े मामले पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान इस बात पर भी निराशा जताई कि सरकार विदेश में छिपाए गए काले धन को वापस नहीं ला पा रही है।

जेठमलानी पहले बीजेपी के साथ ही थे और उन्होंने इस मुद्दे पर वह पीआईएल दाखिल करने में मुख्य भूमिका निभाई थी, जिसके चलते यूपीए सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान बीजेपी नेताओं ने विदेश में जमा काला धन लाने के बारे में बढ़-चढ़कर वादे किए थे। बाद में 'मन की बात' कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उन्हें नहीं पता कि विदेश में कितना काला धन है। हालांकि सरकार बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई थी।


जेठमलानी के वकील अनिल दीवान ने देश के चीफ जस्टिस एच. एल. दत्तू, जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस ए. के. सीकरी की बेंच से मंगलवार को कहा कि काले धन के मामले में अब तक कोई रकम रिकवर नहीं की गई है। दीवान ने कहा, 'पिछले छह महीनों में एक पैसा भी देश में नहीं लाया गया है। हो सकता है कि इधर-उधर छापे मारने जैसी कोई कार्रवाई हुई हो।'

जेठमलानी ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार का कदम 'पूरी तरह निराशाजनक' है। उन्होंने कहा, 'मैं कोई अपनी रकम रिकवर करने की बात नहीं कर रहा हूं। यह देश की रकम है। जब तक कानून नहीं बनता, एक पैसा भी नहीं आने वाला है।' जेठमलानी ने कहा, 'मैंने एक लॉ ड्राफ्ट किया था और उसकी कॉपी पीएम को भेजी थी। उसे फाइनैंस मिनिस्ट्री को भेजा गया। सवाल यह है कि क्या सरकार इस कानून के पक्ष में है? अगर वे इसके पक्ष में नहीं हैं तो बता दें। फिर मैं इसे लेकर असल मालिकों यानी जनता के पास जाऊंगा।'

वकील प्रशांत भूषण ने मांग की थी कि जिन लोगों ने विदेश में काला धन छिपाया है, उनके नाम उजागर किए जाने चाहिए। इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस ने भूषण से कहा, 'हमारी दिलचस्पी नाम उजागर करने में नहीं, बल्कि काला धन रिकवर करने में है।' उन्होंने यह बात तब कही, जब भूषण ने दलील दी कि जिन लोगों ने विदेश में अवैध खाते होने की बात स्वीकार की थी और जिन्हें सरकार ने टैक्स और जुर्माना चुकाने की इजाजत दी थी, उनके नाम सामने लाए जाने चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि भूषण और जेठमलानी के वकील को इस बात की इजाजत दी कि वे ब्लैक मनी रिकवर करने के तौर-तरीकों पर नए सुझाव पेश कर सकते हैं।

'धर्म परिवर्तन से कम हो गए 600 करोड़ हिंदू'


प्रवीण तोगड़िया (फाइल फोटो)

विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने कहा है कि '2000 साल पहले मक्का, ईरान और रोम में केवल हिंदू थे। लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन के चलते हिंदुओं की जो संख्या आज 700 करोड़ होनी चाहिए थी वह सिर्फ 100 करोड़ रह गई है।' 

तोगड़िया ने कहा है कि घर वापसी गैरकानूनी और संविधान के खिलाफ नहीं है, इसलिए वे इसे जारी रखेंगे। विश्व हिंदू परिषद के एक सम्मेलन में तोगड़िया ने सुप्रीम कोर्ट की एक रूलिंग सुनाते हुए कहा कि 'हिंदुत्व एक तरीका है।' तोगड़िया का कहना था कि इससे साबित होता है कि घर वापसी कानून सम्मत है। उन्होंने कहा कि वीएचपी एक सख्त ऐंटि-कन्वर्जन कानून के पक्ष में है। 

तोगड़िया ने हिंदुओं को लव जिहाद से भी सावधान रहने की अपील की। तोगड़िया का कहना था कि यह हिंदुओं के लिए आपातकाल जैसे हालात हैं। वे जो भी कहते या करते हैं तो सेक्युलरों की आंखों में चुभने लगते हैं। तोगड़िया का कहना था कि सिर्फ लव जिहाद नहीं जनसंख्या जिहाद भी हो रहा है। 

सरस्वती शिशु मंदिर में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए तोगड़िया ने कहा, हिंदुत्व की ओर लौटना कन्वर्जन नहीं है। तोगड़िया ने कहा, 'मुलायम सिंह यादव कन्वर्जन पर बैन चाहते हैं, हम भी यही चाहते हैं। एक सख्त ऐंटि-कन्वर्जन कानून बनना ही चाहिए।' 

उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि वह इस बात को मानते हैं कि जनसंख्या नियंत्रण से देश का विकास होगा। लेकिन, देश में अब भी कुछ लोगों के 10 बच्चे पैदा हो रहे हैं और बाकी लोग हम दो हमारे दो कह रहे हैं। सभी समुदायों के लिए दो बच्चों का सख्त कानून होना चाहिए। एक लोकतंत्र में ऐसे कानून बनाए जा सकते हैं कि जसके तीन बच्चे होंगे उन्हें राशन कार्ड, लोन जैसी दूसरी सुविधाएं नहीं दी जाएंगी। 

Tuesday, 20 January 2015

संतों ने कहा, जारी रहेगी घर वापसी



इलाहाबाद। धर्मातरण व घर वापसी के मुद्दे पर विश्व हिन्दू परिषद पीछे हटने को तैयार नहीं है। परिषद के मार्गदर्शक मंडल की बैठक में संतों ने एक स्वर से घर वापसी को जायज बताया। साथ ही धर्मातरण रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की। माघ मेला क्षेत्र स्थित जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के शिविर में शुक्रवार की शाम आयोजित विश्व हिंदू परिषद मार्गदर्शक मंडल की बैठक में संतों ने सरकार को चेतावनी भरे लब्जों में साफ किया कि उनकी 'घर वापसीÓ मुहिम आगे भी जारी रहेगी। इसके साथ ही गौ, गंगा रक्षा, श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का मुद्दा भी उठा। संतों ने देश की पश्चिमी सीमा के हालात पर भी चर्चा की और सीमा की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।
स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने धर्मातरण के मुद्दे का उठाते हुए कहा कि दुनिया में सिर्फ सनातन धर्म ही एक मात्र धर्म है। बाकी सब मत हैं। इसको लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। सरकार को कुछ करना है तो वह धर्मातरण के खिलाफ कड़ा कानून बनाए। उन्होंने इस दौरान गंगा को बांधमुक्त बनाने पर जोर दिया। कहा कि गंगा की अविरलता व निर्मलता के लिए बांधों को तोडऩा होगा। जगद्गुरु स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि धर्मातरण जुल्म है, परंतु घर वापसी नहीं। स्वेच्छा से अपने धर्म में वापस आने वाले लोगों का स्वागत होना चाहिए, यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने इस दौरान स्लाटर हाउस को बंद करने की मांग की। कहा कि केंद्र सरकार गंगा की निर्मलता, गाय की रक्षा व सीमा की सुरक्षा को लेकर ठोस निर्णय ले जैसा चुनाव के समय वादा किया था। निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि धर्मातरण को घर वापसी से जोडऩा ठीक नहीं है। दोनों में काफी भिन्नताएं हैं।
स्वामी घनश्यामाचार्य ने हिंदू मंदिरों के अधिग्रहण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मंदिरों पर आने वाले चढ़ावे को सनातन धर्म के विकास में खर्च किया जाए। गोपाल जी महाराज ने श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर कदम उठाने की बात कही। इसके पहले विहिप के संगठन महामंत्री दिनेश ने स्वागत करते हुए प्रमुख मुद्दों को उठाया। बैठक में जगद्गुरु विद्यातीर्थ, स्वामी रामरतनदास, महंत दुर्गा दास, स्वामी विवेकानंद सरस्वती, संतोष दास, विहिप के राष्ट्रीय संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी, प्रांत उपाध्यक्ष पुनीत वर्मा, मनोज श्रीवास्तव, विमल प्रकाश मौजूद थे।
माघ मेला क्षेत्र में विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में शामिल जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, महंत नरेंद्र गिरि एवं अन्य।
सिंहल व नृत्यगोपाल नहीं पहुंचे-विहिप के मार्गदर्शक मंडल की बैठक में श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास व विहिप संरक्षक अशोक सिंहल शामिल नहीं हुए। उनका स्वास्थ्य खराब होने की बात बताई गई। वह शनिवार को होने वाले संत सम्मेलन में भाग ले सकते हैं।

'हिंदू-मुस्लिमों को समान संख्या में बच्चे पैदा करने का हो अधिकार'



इलाहाबाद, जागरण संवाददाता। त्रिवेणी तट पर बैठी 'सनातन धर्म संसद' ने साईं बाबा की मूर्ति पूजा का मुखर विरोध किया। सबने एक स्वर में सरकार से साईं पूजा पर पाबंदी लगाने की मांग की। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के माघमेला क्षेत्र स्थित शिविर में रविवार को आयोजित धर्म संसद में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के साथ ही सभी अखाड़ों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
अध्यक्षता कर रहे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि इस्लाम मुहम्मद साहब व ईसाइयों का धर्म यीशु ने शुरू किया। दोनों के वंशज न मुसलमान थे न ईसाई। जबकि सनातन धर्म सबसे प्राचीन है। इसलिए इसकी किसी से तुलना हो ही नहीं सकती। उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे जन्म से ही हिंदू होते हैं, जबकि अन्य इस्लाम, ईसाई आदि में जन्म के बाद खतना जैसी क्रियाएं करके धर्मानुयायी बनाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मांतरण के लिए विदेशों से पैसा आ रहा है। सरकार को उसे जब्त करना चाहिए। हिंदुओं की संख्या संख्या बढ़ाने को लेकर अधिक बच्चे पैदा करने के बयान का विरोध करते हुए कहा कि यह समस्या का समाधान नहीं है। बल्कि सभी के लिए समान नागरिक संहिता होनी चाहिए। इसमें हिंदू व मुसलमानों को समान संख्या में बच्चा पैदा करने का अधिकार होना चाहिए।
पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने वेदों के विलुप्त होने व गौहत्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गंगा के विकास के नाम पर उन्हें खत्म करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। इसके खिलाफ सनातन धर्म के अनुयायियों को मुखर होना होगा। कहा कि हम शासन बनाना जानते हैं, तो दिशाहीन शासनतंत्र को दंडित करना भी हमें आता है। अग्नि अखाड़ा के आचार्य पीठाधीश्वर रामकृष्णानंद ने कहा कि राजनीतिक दल स्वयं के हित को नए शंकराचार्य बना रहे हैं जो धर्म के खिलाफ है।
संयोजन निरंजनी अखाड़ा के महंत नरेंद्र गिरि व संचालन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने किया। इस दौरान हरिनारायणानंद, लक्ष्मीमणी शास्त्री, आनंद अखाड़ा के राजेश्वरानंद, महानिर्वाणी के जगदीश पुरी, जूना के सुरेशानंद, आह्वान के तुलसी गिरि, बड़ा से महंत अग्रदास व निर्मल अखाड़ा के देवेंद्र शास्त्री आदि ने विचार व्यक्त किए।

Monday, 19 January 2015

ओबामा यात्रा के दौरान आतंकी हमला हुआ तो भुगतेगा पाक: अमेरिका


बराक ओबामा 26 जनवरी परेड के चीफ गेस्ट होंगे

राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे के मद्देनजर अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान को चेताया है कि अगर उस दौरान सीमापार से कोई भी आतंकी हमला हुआ तो उसकी कीमत पाकिस्तान को चुकानी पड़ेगी। ओबामा को रिपब्लिक डे परेड में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लेना है। वह ऐसा करने वाले पहले अमेरिकी प्रेजिडेंट होंगे। अमेरिका ने पाकिस्तान से कहा है कि वह सुनिश्चित करे कि उस दौरान सीमापार से कोई आतंकी गतिविधि न हो।
अमेरिकी और भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं क्योंकि ओबामा राजपथ पर दो घंटे से ज्यादा खुले आकाश के नीचे परेड देखेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका ने पाकिस्तान से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि ओबामा की भारत में मौजूदगी के दौरान किसी तरह की आतंकी वारदात या प्रयास न हों। कहा जा रहा है कि अमेरिका ने कहा है अगर ओबामा की यात्रा के दौरान कोई आतंकी घटना होती है और उसका लिंक पाकिस्तान से जुड़ता है तो उसे परिणाम भुगतने होंगे।
ऐसा पाकिस्तान के पुराने रेकॉर्ड को देखते हुए किया गया है। वर्ष 2000 में प्रेजिडेंट बिल क्लिंटन के भारत दौरे के समय 20 मार्च को आतंकियों ने अनंतनाग जिले में हमलाकर 36 सिखों की हत्या कर दी थी। इसके साथ ही अफगानिस्तान में मौजूद अमेरिकी फौज की भी नजर आतंकी संगठनों पर रहेगी। पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास को भी अलर्ट कर दिया गया है।

रात को लड़कियों का रेप करते हैं ISIS आतंकी और…

 अभी तक अल बगदादी बेगुनाहों की लाशें बिछा रहा था और इराक से लेकर सीरिया तक हैवानियत का खेल खेल रहा था। लेकिन अब इससे भी एक कदम आगे बढ़ाते हुए बगदादी अपने हरम में कैद यजीदी समुदाय की लड़कियों का जबरन खून निकलवा रहा है।

दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी के प्लान ब्लड का सनसनीखेज खुलासा एक पीड़ित लड़की ने किया। पीड़ित लड़की के मुताबिक बगदादी बंधक लड़कियों का जबरन खून निकला रहा है। इस काम के लिए बकायदा विदेशों से दर्जनभर से ज्यादा डॉक्टरों की टीम बुला रखी है।

लड़की ने बताया, ‘ISIS आतंकियों ने मेरे पति की हत्या कर दी और फिर मुझे अपने साथ ले गए। मैं करीब 15 दिनों तक आतंकियों के चुंगल में कैद रही। रात को आतंकी मेरे साथ बलात्कार करते और दिन में हथियार की नोक पर मेरे शरीर से खून निकाला जाता। ऐसा सिर्फ मेरे साथ नहीं हो रहा था बल्कि वहां मौजूद सैकडों दूसरी लड़कियों और छोटी-छोटी मासूमों का भी जबरन खून निकलवा रहे थे आतंकी। उसने बताया कि हमारे साथ जानवरों से बदतर सलूक किया जाता था। कई दिनों तक भूखे-प्यारे रखा जाता था। आतंकी कहते थे कि तुम लोग मर जाओ हमें कोई फर्क नहीं पडेगा, लेकिन तुम लोगों के खून से हमारे जख्मी साथियों की जिंदगी तो बच जाएगी।
बगदादी इन लड़कियों के खून से जख्मी आतंकियों का इलाज करवा रहा है। खबरों के मुताबिक अमेरिका के हवाई हमले में अभी तक करीब 700 से ज्यादा आतंकी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे है। इलाज के दौरान इन आतंकियों की जान बचाने के लिए बगदादी को खून की जरूरत पड़ रही है ऐसे में जख्मी आतंकियों के लिए ही बगदादी अब लड़कियों का जबरन खून निकलवा रहा है।

Sunday, 18 January 2015

"राजपूत शिरोमणि श्री महाराणा प्रतापसिंह जी"


नाम - कुँवर प्रताप जी {श्री महाराणा प्रतापसिंह जी}
जन्म - 9 मई, 1540 ई.
जन्म भूमि - राजस्थान कुम्भलगढ़
पुन्य तिथि - 29 जनवरी, 1597 ई.
पिता - श्री महाराणा उदयसिंह जी
माता - राणी जीवत कँवर जी
राज्य सीमा - मेवाड़
शासन काल - 1568–1597ई.
शा. अवधि - 29 वर्ष
वंश - सुर्यवंश
राजवंश - सिसोदिया
राजघराना - राजपूताना
धार्मिक मान्यता - हिंदू धर्म
युद्ध - हल्दीघाटी का युद्ध
राजधानी - उदयपुर
पूर्वाधिकारी - महाराणा उदयसिंह जी
उत्तराधिकारी - राणा अमर सिंह जी
अन्य जानकारी - श्री महाराणा प्रताप सिंह
जी के पास एक सबसे प्रिय घोड़ा था,
जिसका नाम 'चेतक' था।
‌‌‌‌‌‌‌"राजपूत शिरोमणि श्री महाराणा प्रतापसिंह जी" उदयपुर, मेवाड़ में
सिसोदिया राजवंश के राजा थे।
वह तिथि धन्य है, जब मेवाड़ की शौर्य-भूमि परमेवाड़-मुकुट
मणि राणा प्रताप जी का जन्म हुआ। श्री प्रताप जी का नाम इतिहास
मेंवीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है।
श्री महाराणा प्रतापजी की जयंती विक्रमी सम्वत् कॅलण्डर केअनुसार
प्रतिवर्ष ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है।
श्री महाराणा प्रताप सिंह जी के बारे में कुछरोचक जानकारी :-
1... श्री महाराणा प्रताप सिंह जी एकही झटके में घोड़े समेत दुश्मन
सैनिक को काट डालते थे।
2.... जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थेतब उन्होने
अपनी माँ सेपूछा कि हिंदुस्तान से आपके लिए क्या लेकर
आए| तब माँ का जवाब मिला ” उस महान देश की वीर भूमि हल्दी घाटी से
एक मुट्ठी धूल
लेकरआना जहाँ का राजा अपनी प्रजा केप्रति इतना वफ़ादार
था कि उसने आधे हिंदुस्तान के बदले अपनी मातृभूमि को चुना ”
बदकिस्मती से उनका वो दौरा रद्द हो गया था | “बुक ऑफ़ प्रेसिडेंट यु
एस ए ‘किताब में आप ये बात पढ़ सकते है |
3.... श्री महाराणा प्रताप सिंह जी के भाले का वजन 80 किलो था और
कवच का वजन 80 किलो कवच , भाला, ढाल, और हाथ में तलवार
का वजन मिलाये तो 207 किलो था।
4.... आज भी महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान उदयपुर
राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं |
5.... अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है
तो आधा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे पर बादशाहत अकबर
की ही रहेगी पर श्री महाराणा प्रताप जी ने
किसी की भी आधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया |
6.... हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और अकबर
की ओर से 85000 सैनिक युद्ध में सम्मिलित हुए |
7.... श्री महाराणा प्रताप जी के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना हुवा हैं
जो आज भी हल्दी घाटी में सुरक्षित है |
8.... श्री महाराणा प्रताप जी ने जब महलो का त्याग किया तब उनके
साथ लुहार जाति के हजारो लोगो ने भी घर छोड़ा और दिन रात
राणा जी कि फौज के लिए तलवारे बनायीं इसी समाज को आज गुजरात
मध्यप्रदेश और राजस्थान में गड़लिया लोहार कहा जाता है मै नमन
करता हूँ एसे लोगो को |
9.... हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वहाँ जमीनों में तलवारें
पायी गयी। आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 में हल्दी घाटी में
मिला |
10..... श्री महाराणा प्रताप सिंह जी अस्त्र शस्त्र
की शिक्षा "श्री जैमल मेड़तिया जी" ने दी थी जो 8000 राजपूत
वीरो को लेकर 60000 से लड़े थे। उस युद्ध में 48000 मारे गए थे
जिनमे 8000 राजपूत और 40000 मुग़ल थे |
11.... श्री महाराणा प्रताप सिंह जी के देहांत पर अकबर भी रो पड़ा था |
12.... मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में अकबर की फौज
को अपने तीरो से रौंद डाला था वो श्री महाराणा प्रताप
को अपना बेटा मानते थे और राणा जी बिना भेद भाव के उन के साथ रहते
थे आज भी मेवाड़ के राजचिन्ह पर एक तरफ राजपूत है तो दूसरी तरफ
भील |
13..... राणा जी का घोडा चेतक महाराणा जी को 26 फीट का दरिया पार
करने के बाद वीर गति को प्राप्त हुआ | उसकी एक टांग टूटने के बाद
भी वह दरिया पार कर गया। जहा वो घायल हुआ वहीं आज
खोड़ी इमली नाम का पेड़ है जहाँ पर चेतक की म्रत्यु हुई वहाँ चेतक मंदिर
है |
14..... राणा जी का घोडा चेतक भी बहुत ताकतवर था उसके मुँह के आगे
दुश्मन के हाथियों को भ्रमीत करने के लिए हाथी की सूंड लगाई
जाती थी । यह हेतक और चेतक नाम के दो घोड़े थे |
15..... मरने से पहले श्री महाराणाप्रताप जी ने अपना खोया हुआ 85 %
मेवाड फिर से जीत लिया था । सोने चांदी और महलो को छोड़ वो 20
साल मेवाड़ के जंगलो में घूमे |
16.... श्री महाराणा प्रताप जी का वजन 110 किलो और लम्बाई 7’5”
थी, दो म्यान वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे हाथ मे।

Saturday, 17 January 2015

मदरसों में दिए जा रहे हैं हिंदू संस्कार

राजनीति में भले ही कई बार जात-पात और धर्म के नाम पर सियासी ध्रुवीकरण होता हो लेकिन 12 साल की शबनम को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.
मध्‍य प्रदेश के मंदसौर ज़िले में एक नहीं ऐसी अनेक शबनम और आदिल हैं, जो मदरसे में हिंदू धर्म की शिक्षा लेने में भी रुचि दिखा रहे हैं.
उन्‍हें इस्‍लामी दीनियात के साथ हिंदू धर्म के सोलह संस्‍कारों, गीता सार और गायत्री मंत्र की शिक्षा भी दी जा रही है.
तेरह साल की जैनब जब सोलह संस्‍कारों को एक सांस में सुनाती है तो सुनने वाला हतप्रभ रह जाता है.
मंदसौर में 17 साल पहले महिलाओं- जिनमें पांच मुसलमान हैं और दो हिंदू- ने निदा महिला मंडल (एनएमएम) बनाकर मदरसों से हिंदुत्व और इस्लाम की शिक्षा देना शुरू किया था.

डॉक्टर तलत कुरैशी
डॉक्टर तलत कुरैशी मदरसों को संचालित करने वाले निदा महिला मंडल की अध्यक्ष हैं.

इसकी अध्‍यक्ष तलत कुरैशी कहती हैं, "हम गरीब परिवारों के बच्‍चों को शिक्षा देने का काम कर रहे हैं. कई हिंदू गरीब परिवार अपने बच्‍चों को पढ़ाना चाहते थे लेकिन जब हमने धार्मिक शिक्षा को लेकर उनकी चिंताओं को देखा तो मदरसों का पुराना पैटर्न लागू किया. ऐसा, जो काफ़ी सस्‍ता था और जिसने राजा राममोहन राय, मुंशी प्रेमचंद और भारतेंदु हरिश्‍चंद्र जैसे नामचीन शख्‍स दिए."
निदा महिला मंडल 128 मदरसों को संचालित करता है और इसका मुख्‍यालय मदरसा फिरदौस है. गुरुकुल विद्यापीठ, नाकोडा, ज्ञान सागर, संत रविदास, एंजिल और जैन वर्धमान सरीखे नाम वाले 128 मदरसों में से 78 मदरसों में मुस्‍लिम छात्रों के साथ हिंदू बच्‍चे भी पढ़ते हैं.
तलत बताती हैं कि 14 मदरसों को सरकारी अनुदान मिलता है लेकिन समय पर नहीं. हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा पढ़ना ज़रूरी है, जबकि तीसरी भाषा के लिए उर्दू और संस्‍कृत में से एक का विकल्‍प दिया जाता है.
"दीनी तालीम के लिए कोई बंदिश नहीं है. जो बच्‍चे उर्दू लेते हैं, उन्‍हें दीनियात और संस्‍कृत वाले बच्‍चों को हिंदू धर्म की पुस्‍तक पढ़ाई जाती है. चूंकि एक छत के नीचे एक माहौल में सारे बच्‍चे पढ़ते हैं तो उनका परस्‍पर धार्मिक किताबों में दिलचस्‍पी लेना लाजमी है."

हिंदुत्व- इस्लाम की शिक्षा देने वाला मदरसा

ज़िला मदरसा केन्‍द्र के समन्वयक डॉक्टर शाहिद कुरैशी बताते हैं, "मध्‍य प्रदेश में आधुनिक मदरसों में धार्मिक शिक्षा की पुस्तक ज़रूरी है. सिलेबस का निर्धारण भी संस्था को करना है. लिहाजा हिंदू बच्चों की संख्या देखते हुए हमने अपने मित्र नेमीचंद राठौर से हिंदू धर्म पर एक पुस्‍तक लिखने का आग्रह किया. उन्होंने 'हिंदू धर्म सोलह संस्कार, नित्यकर्म एवं मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार' शीर्षक से किताब लिखी."
इस किताब में नित्यकर्म, दंतधावन विधि, क्षौर कर्म, स्नान, वस्‍त्र धारण विधि, आसन, तिलक धारण प्रकार, हाथों में तीर्थ, जप विधि, प्राणायाम, नित्य दान, मानस पूजा, भोजन विधि, धार्मिक दृष्टि में अंकों का महत्व और नवकार मंत्र को भी शामिल किया गया है.
शाहिद बताते हैं कि मदरसों के शिक्षक हिंदू धर्म पर आधारित इस पुस्तक को भी पढ़ा रहे हैं, "इसके ज़रिए दोनों ही धर्मों के बच्चों और शिक्षकों ने एक-दूसरे को जानने और समझने की पहल की है."

हिंदुत्व- इस्लाम की शिक्षा देने वाला मदरसा

उन्‍होंने बताया कि साढ़े 13 लाख की आबादी वाले मंदसौर ज़िले में लगभग 250 मदरसे संचालित किए जा रहे हैं और इनमें दोनों धर्मों के लगभग 15 हज़ार बच्‍चे (एनएमएम के 128 मदरसों के 12 हज़ार बच्‍चों सहित) पढ़ते हैं.
ख़ास बात यह है कि पन्‍द्रह हज़ार बच्‍चों में से 55 फ़ीसदी हिंदू हैं. लगभग 20 मदरसों में स्‍मार्ट क्‍लासेज प्रारंभ की गई हैं और पहली से चौथी तक अंग्रेज़ी माध्‍यम भी शुरू किया गया है.
पेशे से पत्रकार और पुस्‍तक के लेखक नेमीचंद राठौर ने बताया कि डॉ कुरैशी के आग्रह पर संकलन तैयार तो कर दिया पर मन में शंका थी कि मदरसों में यह किताब स्वीकार भी होगी या नहीं. लेकिन हिंदू बच्चों के साथ जब मुस्लिम बच्चों और शिक्षकों ने भी इसे पसंद किया तो ख़ुशी हुई.
राठौर के अनुसार बीते पांच वर्षों से उनकी पुस्‍तक मदरसों में पढ़ाई जा रही है.
मदरसा फिरदौस की छात्रा जैनब गौरी ने बीबीसी से कहा, "दोनों धर्मों की किताबों में कई सारी बातें एक सी हैं. सिर्फ़ नाम अलग-अलग हैं."
जैनब को हिंदू धर्म की पूरी पुस्‍तक याद है. वह पूछती हैं, "हम सब जब रोटी एक खाते हैं तो अलग कैसे हुए."
इसी मदरसे की 11वीं की छात्रा आयुषि वर्शी कहती है धार्मिक शिक्षा को लेकर कोई पाबंदी नहीं है. उसके पिता संजीव बताते हैं कि पन्‍द्रह सौ रुपये की सालाना फ़ीस में ऐसी मॉडर्न शिक्षा कहीं और नहीं मिल सकती.

मदरसा, हिंदू शिक्षा

वह कहते हैं, "मैंने तो कभी नहीं देखा कि एक स्‍कूल में दोनों धर्मों की अलग-अलग शिक्षा दी जाती हो."
मदरसा फिरदौस की टीचर नुसरत ख़ान कहती हैं, "मदरसे में हिंदू धर्म से संबंधित पुस्तक देखकर पहले तो हमको ही कुछ अटपटा लगा. लेकिन पढ़ने के बाद हिचक दूर हो गई. हिंदू बच्चों को पढ़ता देख कई मुस्लिम बच्चे भी इसमें दिलचस्‍पी दिखाने लगे."
भोपाल के नोशेरवान-ए-आदिल कहते हैं, "ये मदरसे उन लोगों के लिए आईना हैं, जो सेक्‍युलरिज्‍म–कम्‍युनलिज्‍म के नाम पर सियासी रोटियां सेंक मुल्‍क का नुक़सान करते हैं."

Friday, 16 January 2015

पाकिस्तान: हिंदुओं के लिए होगा अलग मैरिज एक्ट



पाकिस्तान में छोटी उम्र की लड़कियों के धर्मान्तरण और उनकी जबरन शादियों से टूट चुके हिदुओं के लिए वहां के सुप्रीम कोर्ट ने एक उम्मीद की किरण दिखाई है।

पाक नेशनल असेंबली में अल्पसंख्यक कोटे के एक सांसद के निवेदन पर अदालत ने पाकिस्तान सरकार से कहा है कि वह दो हफ्ते में हिंदू मैरिज एक्ट के मसौदे पर मुहर लगाए।

अल्पसंख्यकों को सुरक्षा और अधिकार दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती का पाक हिंदू काउंसिल (पीएचसी) समेत कई संगठनों ने स्वागत किया है। उनका मानना है कि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत शादियों का रजिस्ट्रेशन होने से उन्हें और उनके बच्चों को पहचान पत्र से लेकर पासपोर्ट बनवाने तक दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़ेंगी।

पाकिस्तान के सिंध समेत अन्य प्रांतों में पिछले साल मासूम हिंदू लड़कियों को अगवा कर उनका जबरन धर्मांतरण कराने और ज्यादा उम्र के पुरुषों से विवाह कराने की कई घटनाएं हुई थीं।

इनमें कई मामले पुलिस तक गए और अब दो मामलों में नाबालिग लड़कियों को कराची के शेल्टर होम में रखा गया है। उनके माता-पिता बेटियों को साथ ले जाना चाहते हैं, लेकिन उनके सामने खुद की पहचान का संकट है।

पाक नेशनल असेंबली में पीएमएल-एन के अल्पसंख्यक सांसद डा. रमेश कुमार वांकवानी और दूसरे सदस्य दर्शन लाल ने पिछले साल जून में इस तरह की समस्याओं से निजात के लिए हिंदू मैरिज एक्ट पेश किया था। तब से बिल स्टैंडिंग कमेटी के पास है।

डा. रमेश कानून बनवाने के लिए जब सुप्रीम कोर्ट गए तो मंगलवार को अदालत ने हिंदू मैरिज एक्ट दो हफ्ते में कैबिनेट से पास कराने का जिम्मा एटार्नी जनरल को सौंप दिया। मामले में अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी। पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के अध्यक्ष चेला राम केवलानी ने इस फैसले को ऐतिहासिक माना है।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के वरिष्ठ दलित नेता सुरेंद्र वलसाई ने दावा किया कि सिंध प्रांत में उनके दल की सरकार सबसे पहले हिंदू मैरिज एक्ट लागू करेगी।

अमर उजाला के सवाल पर उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा हिंदू परिवार सिंध में कराची के आसपास ही रहते हैं और उन्हें छोट-मोटे सरकारी काम के लिए दिक्कत होती है। इसलिए वे नया कानून जल्द लागू करवाने के लिए राज्य सरकार को राजी कर चुके हैं।

पाक में करीब 30 लाख हिंदू रहते हैं। इनमें हिंदुओं की कुल संख्या 1.85 फीसदी है। 6.6 फीसदी हिंदू अकेले सिंध प्रांत में रहते हैं।