Tuesday, 30 December 2014

'पाकिस्तान में भी कोई पीके बनाएगा ?'

हर वर्ष की तरह ये वर्ष भी उतना ही बुरा और अच्छा था जितना कोई भी हो सकता है. बस आख़िरी हफ़्ते में ये हुआ कि मैंने कराची के सबसे अच्छे सिनेमाघर में 'पीके' देख ली.
हर दर्शक के पास पीके देखने की कोई न कोई वजह है. कोई बस आमिर ख़ान का फ़ैन है, किसी ने पोस्टर पर राजकुमार हीरानी का नाम देख लिया और उसे 'थ्री ईडियट्स' याद आ गई. हो सकता है किसी ने अनुष्का शर्मा के चक्कर में टिकट ख़रीद लिया हो.
ये भी मुमकिन है कि किसी ने बस इसलिए पीके देखने का फ़ैसला किया हो कि बहुत से हिन्दू उसे नापसंद करते हैं और जिस फ़िल्म को हिन्दू पसंद नहीं करते, उसमें यक़ीनन कोई अच्छी चीज़ ही होगी.

अगले सीन का इंतज़ार

पीके, आमिर ख़ान, फ़िल्म, अनुष्का शर्मा
बहुत पहले ये लतीफ़ा सुना था कि एक साहब फ़िल्म देख रहे थे, एक सीन में हीरोइन रेल की पटरी के नज़दीक बने तालाब में नहाने के लिए जैसे ही चोली उतारने लगती है, अचानक से एक ट्रेन सामने से गुज़र जाती है और फिर सीन ही बदल जाता है. इसके बाद उन साहब ने फ़िल्म का हर शो देखना शुरू कर दिया.
सातवीं या आठवीं दफ़ा गेटकीपर ने पूछ ही लिया, ''साहब ख़ैर तो है, क्या फ़िल्म बहुत पसंद आ गई.''
उन साहब ने कहा, ''नहीं यार ऐसी कोई बात नहीं, मैं तो इस उम्मीद पर हर शो देख रहा हूँ कि कभी तो ट्रेन लेट होगी.''

सीन में चालाकी

पीके, पोस्टर, आमिर ख़ान
अपने मुँह से ख़ैर कोई नहीं बताएगा, मगर हज़ारों ने इसलिए सिनेमाघरों का रुख़ किया होगा कि देखें तो सही, आमिर ख़ान का ट्रांज़िस्टर कब इधर-उधर होता है. मगर डायरेक्टर हीरानी ने ट्रांज़िस्टर वाले सीन में भी चालाकी दिखा दी और ऐन वक़्त पर धूल उठा दी. और सिनेमाघर में एक साथ कई आवाज़ें सुनाई दीं, 'अरे यार मुझे पहले ही पता था'.
इसलिए जिन दर्शकों ने अब तक फ़िल्म नहीं देखी उन्हें मेरा मशविरा है कि ट्रांज़िस्टर वाले सीन के चक्कर में पैसे ज़ाया न करें.
अगर पीके देखनी ही है तो उसके मैसेज पर ध्यान दें. यानी असली भगवान या ख़ुदा की लोकप्रियता को कैश कराने के लिए जिन पुरोहितों और मौलवियों ने फ्रंट कंपनियाँ खोलकर 'यहाँ असली ख़ुदा और भगवान मिलता है' का बोर्ड लगा रखा है, उनसे बचें और अपना ख़ुदा और भगवान ख़ुद तलाश करें.

फ़िल्म का संदेश

मगर क्या वाक़ई पीके अपने दर्शकों तक ये संदेश पहुँचाने में कामयाब रही?
जब शो ख़त्म हुआ तो मैंने कई तमाशाइयों को कहते सुना, अरे यार क्या वाट लगाई है इन्होंने हिन्दुओं की...फ़ुल तफ़रीह ली है....ईमान से...मगर हमारा मौलवी भी तो यही कर रहा है...अरे आहिस्ता बोल.
जो लोग ऐसी फ़िल्में बना रहे हैं उन्हें मेरा सलाम. झूठ की कालिख, सच्चाई की एक आधी किरण नहीं छीज सकती, लगातार कई किरणें मुसलसल बिखेरने की ज़रूरत है.
अंधेरा हटाने के लिए सबसे ज़्यादा मेहनत, झुटपुटे को करनी पड़ती है. उसके बाद सूरज का निकलना आसान हो जाता है.
ऐसी फ़िल्म पाकिस्तान में बनाने का अभी किसी का हौसला नहीं और कारण आप जानते ही हैं.

Sunday, 28 December 2014

फांसी देना बंद करे पाकिस्तान: बान की मून

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से अपील की है कि पाकिस्तान में फांसी पर लगे प्रतिबंध को दोबारा बहाल किया जाए.
पाकिस्तान सरकार ने पिछले हफ़्ते पेशावर में स्कूल हमले के बाद देश में फांसी की सज़ा पर लगी रोक को हटाते हुए उस पर तुरंत कार्रवाई करने का फ़ैसला किया था.
लेकिन पाकिस्तान सरकार का कहना है कि इस वक़्त देश के हालात ऐसे हैं कि उन्हें इस तरह के फ़ैसले लेने पड़ रहे हैं.
प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के प्रवक्ता मुसद्दिक़ मलिक ने एक बयान जारी कर कहा, ''पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय जगत का सम्मान करता है, लेकिन इस समय देश असामान्य स्थिति से दो चार है जिसके लिए असामान्य क़दम उठाने की ज़रूरत है.''
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने बताया कि बान की मून ने प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से फ़ोन पर बात की और उनसे पेशावर में बच्चों की मौतों पर अफ़सोस जताया.

छह को फांसी

पेशावर श्रद्धांजलि
बान की मून के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि इस मुश्किल स्थिति को पूरी तरह से समझते हुए महासचिव ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि वहां फांसी देने पर लगाया गया प्रतिबंध फिर लागू किया जाए.
इस महीने की 16 तारीख़ को पेशावर में सेना के एक स्कूल में चरमपंथियों के हमले में 132 बच्चों समेत 141 लोगों की मौत हो गई थी.
इसके बाद से पाकिस्तान सरकार ने फांसी देने पर लगी रोक हटा ली थी. इस फ़ैसले के बाद छह लोगों को फांसी दी जा चुकी है जो चरमपंथी हमलों में दोषी पाए गए थे और तमाम क्षमा याचनाओं को ख़ारिज किया जा चुका था.

गंगाजल हुआ काला, बिन डुबकी लौटे श्रद्धालु



गंगाजल को लेकर जिला प्रशासन की लापरवाही सोमवार को फिर उजागर हुई। दारागंज स्थित दशाश्वमेध घाट पर गंगाजल काला हो गया। सुबह स्नान करने पहुंचे लोग काला जल देखकर बिना डुबकी लगाए लौट गए। घाट के पास ही नदी में नाले के जरिए सीवर का पानी मिला रहा है।
पतितपावनी के इस हाल से गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों के उन दावों की भी हवा निकल गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि गंगा-यमुना में गिरने वाले 27 नाले टैप कर दिए गए हैं। माघ मेला शुरू होने में पखवारा भर भी नहीं बचा है, लेकिन गंगाजल की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है।
दारागंज से संगम तक गंगाजल की स्थिति बेहद खराब है। इस हिस्से में पानी कभी काला तो कभी लाल हो जा रहा है। यमुना में पुराने पुल के ऊपर से गुजर रही क्षतिग्रस्त पाइप लाइन से हजारों लीटर गंदा पानी रोज गिर रहा है।
इससे यमुना में भी काफी दूर तक झाग नजर आ रहा है। इस बीच सोमवार को दशाश्वमेध घाट के पास गंगाजल बिलकुल काला हो गया। पता चला कि यहां सीवर का पानी नाले के जरिए सीधे गंगा में गिर रहा है।

हिंदुआेंकी धर्मभावना आहत करनेवाले ‘पीके’ चलचित्रके विरोधमें हिन्दुआेंका आक्रोश

हिन्दू संगठित न होनेसे ही उनकी धर्मभावनाएं आहत करनेवाले ऐसे चलचित्र प्रदर्शित होते हैं !

देवता एवं सन्तोंका तुच्छतासे उल्लेख ! मन्दिरसम्बन्धी अववमानकारक वक्तव्य ! लव जिहादका उदात्तीकरण 



 हाल ही में प्रदर्शित हुए राजकुमार हिरानी निर्देशित और आमीर खानकी प्रमुख भूमिकाका चलचित्र पीके श्रद्धालुआेंकी भावनाएं आहत करनेवाला है । चलचित्र देखनेवाले समझ न पाए, इस प्रकारसे इस चलचित्रमें बडी खूबीसे चित्रण किया गया है, इसलिए हिन्दुआेंमें आक्रोश हो रहा है ।
सामाजिक जालस्थलपे (‘इंटरनेट’पे) इस चलचित्रके विरोधमें हिंन्दुआेंने सन्तप्त प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं । इस सन्दर्भमें शीघ्र ही पुलिस थानेमें परिवाद प्रविष्ट किया जानेवाला है 
चलचित्रका आपत्तिजनक चित्रण

१. महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस चलचित्रकी कथा पूर्णतः लव जिहादका समर्थन करनेवाली है और पाकके मुसलमान युवक एवं भारतकी हिन्दू युवतियोंको एकत्र लानेके लिए बनाई गई है । हिन्दू युवतियोंको मुसलमान युवकोंसे विवाह करनेके लिए प्रवृत्त किया गया है । साथ ही यह दिखाया है कि एक कर्मकाण्डी हिन्दू परिवार इसलिए सिद्ध हो जाता है ।
२. चलचित्रद्वारा धर्मपर प्रहार करते समय दिखाया गया है कि हिन्दू धर्ममें पाखण्डी बाबाआेंका महत्त्व बढ गया है तथा खरे ईश्‍वर सन्तोंके पास नहीं हो सकते ।
३. कुछ अनुचित धारणाआेंका इसमें प्रस्तुतिकरण किया गया है, जैसे कि सभी साधु पाखण्डी होते हैं, भक्तोंद्वारा अर्पित राशिसे भगवान शिव अथवा प्रभु श्रीरामका मन्दिर निर्माण करना अनुचित है इ. । साथमें ऐसा भी दिखाया है कि हिन्दू सन्त हिन्दुआेंको मुसलमानोंके विराधमें भडका रहे हैं ।
४. चलचित्रका नायक भगवान शिवकी भूमिका करनेवालेका पीछा करता है ।
५. लोग पीटे नहीं, इसलिए नायक मुखपर देवताआेंके चित्र लगाता है; जिससे लोग उसे पीटते नहीं है । भगवान खो गए हैं, इस आशयके हस्तपत्रक नायक बांटता है ।
६. भगवानपर श्रद्धा रखकर लोग मूर्खता करते हैं, इस आशयके अनेक प्रसंग इस चलचित्रमें घुसाए हैं ।
७. नायकका नाम पीके अर्थात मद्यपान किया हुआ, इस अर्थसे ही लिया गया है ।
८. संवादोंसे यह व्यक्त किया गया है कि मन्दिरके बाहर रखे जूते इसीलिए रखे जाते हैं कि कोई भी किसीका जूता पहने ।
९. नायक मन्दिरकी दानपेटीसे और भिखारीके कटोरेके पैसे चुराकर खर्च करता है । इसे वह एटीएम मशीन कहता है ।
१०. जन्मसे ही कोई हिन्दू, मुसलमान अथवा ईसाई नहीं होता; परन्तु उपरान्त उसे वैसा बनाया जाता है, ऐसा भी दिखाया है । इससे धर्मनिरपेक्षता दर्शकोंपर थौंपी गई है ।
११. नायक परग्रहसे आया दिखाया है । प्रत्यक्षमें यह एक चमत्कार होता है; परन्तु यही नायक यहांके सन्तोंद्वारा किए चमत्कारोंको झूठा प्रमाणित करता है ।
यह पढकर जिनका रक्त खौलता नहीं है, वे हिन्दू ही नहीं है !

हिन्दुआेंकी धर्मभावनाआेंकी रक्षाके लिए वैध मार्गसे प्रयत्न करनेवाली हिन्दू लिगल सेलका अभिनन्दन !
हिन्दू लिगल सेलकी ओरसे पीके के विरोधमें परिवाद !

शंकाराचार्य की धमकी- PK से विवादित सीन नहीं हटाए तो करवाएंगे सामाजिक बहिष्‍कार

 द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने आमिर खान को हिंदू धर्म के खिलाफ साजिशकर्ता बताते हुए लोगों से उनकी फिल्म पीके का बहिष्कार करने की अपील की है। दैनिकभास्कर डॉट कॉम से फोन पर बातचीत में उन्‍होंने कहा कि यदि आमिर खान माफी मांग कर अपनी फिल्‍म के उन दृश्‍यों को नहीं हटाते, जिनसे हिंदू धर्म का अपमान हुआ है, तो देश भर के हिंदुओं से आमिर के सामाजिक बहिष्कार की अपील की जाएगी।
सरस्‍वती ने कहा कि फिल्म में गाय के लिए खाना निकालने (गौ ग्रास) का मजाक उड़ाया गया है, भगवान शंकर को रिक्शे पर दिखाया गया है, साष्टांग दंडवत किए जाने को गलत बताया गया है। उनके मुताबिक यह सब जान-बूझ कर किया गया है। आमिर खान और उनकी टीम चाहती है कि हिंन्दुओं को धर्म के प्रति नाउम्‍मीद बना कर उनके मन में अनास्था पैदा की जाए ताकि वे दूसरे धर्मों के प्रति आसक्त हो सकें और धर्मांतरण के लिए तैयार हो सकें।
 
शंकराचार्य का यह भी आरोप है कि सेंसर बोर्ड में बैठे नौकरशाहों को फिल्म वाले खरीद लेते हैं और आपत्तिजनक कंटेंट के बाद भी फिल्म को सेंसर से पास करवा लेते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या आपने पीके देखी है, शंकराचार्य का जवाब था कि उन्होंने फिल्म नहीं देखी है लेकिन उनके भक्तों ने फिल्म देखने के बाद बताया है कि इसमें हिंदुओं के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। क्या आप फिल्म देखना चाहेंगे, के जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसी कोई भी फिल्म जिसमें हिंदू धर्म का अपमान किया गया हो, उसे मैं क्‍यों देखूंगा? उन्होंने कहा कि उनके भक्त अलग-अलग कोर्ट में मामला दर्ज करवा रहे हैं।
 
क्या आमिर खान की हर फिल्म का बहिष्कार करने के लिए लोगों से कहेंगे, पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अभी तो सिर्फ इसी फिल्म की बात कर रहा हूं, यदि आमिर खान नहीं सुधरे, तो लोगों से कहा जाएगा कि केवल फिल्म ही नहीं उनके हर कार्यक्रम का बहिष्कार करें।      
 
सरस्‍वती ने पूछा कि आखिरकार फिल्म बनाने वालों को सिर्फ हिंदू धर्म में ही खोट क्यों नजर आती है? उनके मुताबिक, फिल्म निर्माता अन्य धर्मों के खिलाफ फिल्म बनाएंगे तो उन्हें 'ठीक' कर दिया जाएगा।  
 
मुस्लिम धर्मगुरु भी फिल्म ‘पीके’ से नाखुश 

मुस्लिम धर्मगुरु भी फिल्म ‘पीके’ में दिखाए गए कुछ सीन्स को लेकर नाराज हैं। मुस्लिम धर्मगुरु खालिद रशीद फिरंगीमहली ने कहा कि इस फिल्म के कुछ सीन बेहद आपत्तिजनक हैं और हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के सीन हमारे देश की गंगा-जमुनी तहजीब के लिए भी खतरनाक हैं।  

'आईएस को हराना आसान नहीं'


आईएस का पोस्टर

जर्मन लेखक इरगन थोडेनेफ़र को जर्मनी के एक जिहादी से कई महीने की बातचीत के बाद इस्लामिक स्टेट के क़ब्ज़े वाले मोसुल की यात्रा करने की इजाज़त मिली थी.
वह क़रीब एक हफ़्ते तक वहां रहे. लेकिन अंत में किसी तरह वहां से भागकर तुर्की पहुंचे. मोसुल यात्रा से जुड़े अपने अनुभव बीबीसी से साझा करते हुए थोडेनेफ़र ने बताया कि वह आईएस को जितना ताक़तवर और बर्बर समझते थे, वह उससे ज़्यादा ख़तरनाक है और उससे मुक़ाबला मुश्किल है.

इरगन थोडेनेफ़र के अनुभव



आईएस के क़ब्ज़े वाले मोसुल शहर में उन्होंने छह दिन गुज़ारे. वह वहां सीरिया के राक्का होते हुए पहुंचे थे.
मोसुल में रहने के दौरान थोडेनेफ़र को महसूस हुआ कि आईएस के समर्थक उससे बहुत अधिक प्रभावित हैं और उसकी बर्बरता के समर्थक हैं.
उन्होंने कहा कि समर्थकों के विस्तार का मतलब यह है कि हवाई हमलों में उन्हें निशाना बना पाना बहुत कठिन है.
पूर्व जर्मन राजनेता इरगन थोडेनेफ़र बाहर के पहले ऐसे व्यक्ति हैं, आईएस के प्रभाव वाले इलाक़े में बहुत अंदर तक जाकर वापस आए हैं.
हाल के दिनों में पश्चिमी देशों के कुछ लोगों के सिर क़लम किए जाने बाद भी उन्होंने वहां जाने का फ़ैसला किया.
इस साल जून में आईएस ने मोसुल पर बहुत तेज़ी से क़ब्ज़ा कर लिया था. मोसुल में इरगन थोडेनेफ़र ने देखा कि किस तरह यह समूह सुन्नी इस्लामिक क़ानून को कड़ाई से लागू कर रहे हैं.

मोसुल में आईएस का प्रदर्शन

शहर में इश्तहार लगाकर पुरुषों को नमाज़ पढ़ने और महिलाओं को पूरी तरह ढककर रहने की हिदायत दी गई है.
प्रचार सामग्री पर लगे चित्रों पर काला रंग पोत दिया गया है. किताब की एक दुकान पर धार्मिक नियमों से संबंधित पर्चे और किताबें रखी हुई थीं. इनमें यह भी शामिल था कि गुलामों के साथ कैसा व्यवहार करना है.
अपनी यात्रा के दौरान थोडेनेफ़र ख़िलाफ़त के लिए हथियार थामने वाले बच्चों और दुनियाभर से भर्ती किए गए लोगों से भी मिले. इनमें ब्रिटेन, अमरीका, स्वीडन, थाईलैंड और टोबैगो के लोग शामिल थे.
थोडेनेफ़र ने कहा कि वह बर्बरता के लिए उनके उत्साह को देखकर प्रभावित हुए, ''यह एक ऐसा उत्साह था जिसे मैंने युद्धक्षेत्र में पहले कभी नहीं देखा था.''

आत्मविश्वास



वह कहते हैं, ''उनके अंदर बहुत आत्मविश्वास था. ख़ुद पर यक़ीन था. इस साल की शुरुआत में केवल कुछ लोग ही आईएस को जानते थे. लेकिन अव वह ब्रिटेन जितने बड़े इलाक़े पर फ़तह हासिल कर चुके हैं. यह किसी परमाणु बम के धमाके या सुनामी से होने वाले प्रभाव का एक फ़ीसदी है.''
सुरक्षा की गारंटी मिलने के बाद उनके बेटे की ओर से बनाई गई फ़िल्म से इस बात का पता चलता है कि गठबंधन बलों के हवाई हमलों के ख़तरों से बेफ़िक्र होकर यह समूह अपने प्रशासनिक तंत्र को मज़बूत बनाने में लगा हुआ है.
इरगन थोडेनेफ़र कहते हैं, ''मुझे लगा कि वह यह दिखाना चाहते हैं कि इस्लामिक स्टेट काम कर रहा है.''
सतह पर ज़िंदगी उनके उम्मीद से ज़्यादा सामान्य नज़र आती है. लेकिन आईएस के क़ब्ज़े के बाद से ही डर कर शहर के सभी ईसाई और शिया मुसलमान पलायन कर चुके हैं.
अब जिहादियों का अपना न्यायतंत्र है. अदालतों में आईएस के झंडे लगे हुए हैं और उनकी अपनी पुलिस सख़्त इस्लामिक क़ानून लागू करवा रही है.

लेखक इरगन थोडेनेफ़र आईएस के लड़ाकों से बातचीत करते हुए

हालांकि स्थानीय पुलिस के प्रमुख ने उनसे कहा कि अब उन्हें और अधिक कड़े दंड देने की ज़रूरत नहीं है.

लड़ाकों की आपबीती

इरगन थोडेनेफ़र ने अपनी सुरक्षा में लगे लड़ाकों से जो बातचीत की वह, वहां देखी गई चीज़ों से अधिक परेशान करने वाली थी.
उन्होंने कहा कि लड़ाकों को क़ुरान की अधिकांश आयतें याद थीं, वह अपनी बातचीत की शुरुआत यह कहकर करते थे, "अल्लाह बड़ा दयालु है."
उन्होंने कहा, ''मैंने उनसे पूछा, दया कहां है? लेकिन मुझे सही उत्तर कभी नहीं मिला.''
थोडेनेफ़र ने अनुमान लगाया कि शहर में हज़ारों लड़ाके हैं. उन्होंने कहा कि लड़ाके पूरे शहर में फैले हुए हैं, ऐसे में उन्हें निशाना बनाना काफ़ी कठिन है. गठबंधन बलों के हवाई हमलों से बचने के लिए वे समूहों में नहीं निकलते.
इस लेखक का मानना है कि सीरिया की तुलना में इराक़ के अपने प्रभाव इलाक़े में आईएस काफ़ी मज़बूत है, जैसे उसकी तथाकथित सरकार की राजधानी राक्का.
उन्होंने कहा कि सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल-असद अब भी सरकारी कर्मचारियों को वेतन का भुगतान कर रहे हैं.


सुरक्षित म्यूनिख लौटे इरगन थोडेनेफ़र ने कहा, ''मैंने अपने जीवन में जितने भी शत्रु देखे हैं, उनमें आईएस सबसे अधिक ख़तरनाक़ और बर्बर है.''

जान बचाकर भागे

वह कहते हैं, ''मुझे ऐसा कोई नज़र नहीं आया, जो उन्हें रोक सके. केवल अरब ही आईएस को रोक सकते हैं. मैं बहुत निराश होकर लौटा हूं.''
इरगन थोडेनेफ़र बहुत भाग्यशाली थे कि वह सुरक्षित लौट आए. कई महीने की बातचीत के बाद एक जर्मन जिहादी की मदद से वह वहां पहुंचे थे और ख़लीफ़ा के कार्यालय से लौटने की लिखित इजाज़त हासिल करने में कामयाब रहे जिससे कई मौक़ों पर उनकी जान बची.
अंत में इस बारे में अनिश्चय के साथ कि कहीं उनका विचार बदल तो नहीं गया और उन्होंने उन्हें बंधक बनाने का फ़ैसला तो नहीं कर लिया. थोडेनेफ़र और उनके बेटा क़रीब आधा मील दौड़कर तुर्की की सीमा में पहुंचे.


वह कहते हैं, ''हमारे पास जो भी सामान था उसके साथ हमने क़रीब एक हज़ार मीटर तक दौड़ लगाई.''
''जब हम सीमापार हो गए तो अविश्वसनीय रूप से बहुत ख़ुश था. मुझे महसूस हुआ कि मेरे कंधों से टनों बोझ उतर गया है. मैंने अपने परिवार को फ़ोन किया."
"इसी समय मुझे इस बात का एहसास हुआ कि जो मैंने किया है, वह बहुत आसान नहीं था.''

ઓડિયો ટેપમાં ઘટસ્ફોટ: દાઉદે પોતે કબૂલ્યું કે તે પાકિસ્તાનમાં છે

 
ભારતીય પોલીસને આટલા વર્ષોથી છળી રહેલો દાઉદ ઇબ્રાહમ પાકિસ્તાનમાં જ છે તેવો ઘટસ્ફોટ એક ટેપમાં થયો છે. આ ટેપમાં દાઉદ પોતે આ કબૂલાત કરે છે અને પોતે પાકિસ્તાનના પીએમ કરતા વધુ શક્તિશાળી હોવાનો દાવો કરે છે.
ભારત સરકાર પાસે પહેલા જ દાઉદની તાજા તસવીરો આવી ગઈ છે, હવે તેની ટેપ મળતા ભારતને આશા છે કે તે પાકિસ્તાન સરકાર પર આ મુદ્દે દબાણ લાવી શકશે.
દાઉદની ટેપ જાહેર થયા બાદ રાજ્યકક્ષાના ગૃહ પ્રધાન કિરણ રિજ્જૂએ કહ્યું કે, હવે તો પાકિસ્તાને દાઉદ સામે કાર્યવાહી કરવી જ જોઈએ.
અહેવાલો પ્રમાણે સરકારને મળેલી એક ટેપમાં દાઉદનો અવાજ છે, જેમાં કહી રહ્યો છે કે, મારા લોકો મારી આંખ અને કાન છે, મને બેઠા બેઠા દુનિયાની ખબર મળી રહી છે. વડા પ્રધાન પોતે રસ્તાઓ પર નથી ફરતા, મારા શબ્દો દસ્તાવેજ છે, જેને ફાડી શકાય છે, પરંતુ મારા આદેશને નહીં. દાઉદ અને દુબઈમાં એક બિઝનેસમેન વચ્ચે થઈ રહેલી ડીલ દરમિયાન આ અવાજ ટેપ કરાયો છે.
પાકિસ્તાની સેની અને ISISના રહેમરાહે દાઉદ કરાચીના કિલ્ફટન વિસ્તારના વ્હાઇટ હાઉસ નામના બિલ્ડિંગમાં રહે છે. અહીં જ બેસીને તે દુબઈમાં કોરોડો રૂપિયાની ડીલ કરી રહ્યો હતો તે દરમિયાન જાસુસી એજન્સીએ આ કોલ રેકોર્ડ કર્યો છે.
ગુપ્તચર અધિકારીઓના દાવો છે કે અંડરવર્લ્ડ ડોન દુબઈના સૌથી પોશ વિસ્તારની ઉંચી ઇમારત માટેના ખરીદ વેચાણ માટે ડીલ કરતો હોવાનો અંદાજ છે.
૧૧૦૦ કરોડની આ ડીલમાં પાકિસ્તાનના બિઝનેસમેનના છોકરાએ દાઉદને ગેરમાર્ગે દોર્યો હતો. જેથી ગુસ્સે ભરાયેલો દાઉદ તેના માણસને ધમકાવી રહ્યો છે. આ ટેપમાં ડોન યાશિરને ધમકાવે છે કે ડી કંપની સાથેની ચાલાકી તેને મોંઘી પડી શકે છે.
મહત્વનું છે કે ભારતીય પોલીસ છેલ્લા બે દાયકાથી દાઉદ પાકિસ્તનમાં હોવાના પુરાવા શોધી રહી છે. પાકિસ્તાન સરકાર અનેક વાર આ વાતને ફગાવી ચૂકી છે. જોકે આ ટેપ જાહેર થતા ભારત માટે મજબૂત કડી હાથ લાગી છે.
દાઉદ ઇબ્રાહમ મુંબઈના ૧૯૯૩ના વિસ્ફોટો સહિત અનેક હુમલાઓનો આરોપી છે.

महंत योगी आदित्यनाथ जी महाराज


  

    
गोरखपुर के चिलुवाताल थानान्तर्गत मोहरीपुर बाजार के एक घर में तेंदुआ दिखने से अफरा-तफरी मच गई। तेंदुआ एक घर की सीढ़ी के नीचे बने बाथरूम में घुस गया । शाम तक आरा मशीन के गोदाम में बने एक कमरे में घुस गया ,अफरा-तफरी के इस माहौल में तेंदुए ने तीन लोगों को घायल भी कर दिया है। घटना की जानकारी मिलते ही गोरक्षपीठाधीश्वर एवं सांसद महंत योगी आदित्यनाथ जी महाराज पहुंचे पुलिस फोर्स और वन विभाग की टीम को आवश्यक निर्देश दिए ,शाम को अपने क्षेत्र से भ्रमण कर लौट कर पुनः मोहरीपुर बाजार ही थे की दो युवकों को तेंदुए ने घायल कर दिया जिसे तत्काल अपने साथ चल रहे चरगांवा ब्लॉक प्रमुख गजेन्द्र प्रताप सिंह के वाहन से इलाज हेतु मेडिकल कालेज भेजवा दिए, पुलिस फोर्स और वन विभाग के सहयोग से कुछ ही देर में पकड़ लिया गया । मेडिकल कालेज में भर्ती व्यापारी का हालचाल लेते गोरक्षपीठाधीश्वर एवं सांसद महंत योगी आदित्यनाथ जी महाराज, व्यापारी को किसी ने गोली मार् दिया था ।













  















Thursday, 25 December 2014

'गोडसे को फांसी तो श्रद्धानंद के हत्यारों को इनाम क्यों'



बागपत। सांसद साक्षी महाराज ने कहा है कि तुष्टीकरण करने वाले देश के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। कांग्रेस फूट डालो और राज करो की नीति पर काम करती है। वह अभी तक ब्रिटिश हुकूमत की सोच पर ही काम करती आ रही है। अब कांग्रेसी ईस्ट इंडिया कंपनी से भारत मुक्त करना जरूरी हो गया है। नाथूराम गोडसे को फांसी दे दी जाती है, जबकि आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद के शिष्य श्रद्धानंद के हत्यारे को इनाम दिया जाता है। यह तुष्टीकरण नहीं है तो क्या है।
यह बात सांसद साक्षी महाराज ने मवींकला स्थित श्री विनायक कालेज में पत्रकारों से कहीं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व केंद्र सरकार पर धर्मांतरण का आरोप लगा बदनाम करने वाले क्यों नहीं धर्मांतरण पर कोई कड़ा कानून बनने देते हैं। उनकी नीति तुष्टीकरण की है।
योगी आदित्यनाथ या पार्टी के अन्य लोगों के बयान के बारे में उन्होंने कहा कि उसका पार्टी की नीति से कोई लेना देना नहीं है। आजम खां की बात है तो उनके पास जो चश्मा, उसके बारे में सब जानते हैं। वह भारत मां को डायन व अक्सर राष्ट्र की अस्मिता को खंडित करने की बातें करते रहते हैं। तालिबान से पैसा लाने की बात कहने वाला सबसे बड़ा आतंकी नहीं तो फिर कौन है।
श्रीराम मंदिर निर्माण की अगुवाई करेंगे मुसलमानः
सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि देश के लोग चाहते हैं कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का भव्य निर्माण हो, लेकिन इसकी अगुवाई मुसलमान भाई करें। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद मामले के मुद्दई हाशिम अंसारी ने मंदिर निर्माण को जो कदम बढ़ाया है, वह हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की नई मिसाल बनेगा।
उन्होंने कहा कि इसे कांग्रेस ने ही विवादित बनाया। कांग्रेस के शासन में वहां पर मूर्तियां रखी गईं और राजीव गांधी के समय इसका शिलान्यास किया गया। जहां तक भाजपा की बात है तो उसने 2006 में ही अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण कर दिया था। अब तो इसे दिव्य और विशालतम बनाया जाना है।

અયોધ્યામાં ચાર હજાર મુસ્લિમોને હિંદુ બનાવશે વિશ્વ હિંદુ પરિષદ

 દેશમાં ધર્માંતરણના મુદ્દે ચાલી રહેલો વિવાદ અટકવાનું નામ લેતો નથી. વિશ્વ હિંદુ પરિષદ એટલે કે વિહિપ અયોધ્યામાં આવતા મહિને 'ઘર વાપસી'નો એક મોટો કાર્યક્રમ આયોજિત કરવા જઇ રહી છે. તેમાં ચાર હજાર મુસ્લિમોને હિંદુ બનાવવાની યોજના છે. કાર્યક્રમનું આયોજન ભાજપના પૂર્વ સાંસદ રામ વિલાસ વેદાંતી કરાવી રહ્યા છે.

જોકે, તેમણે  મુસ્લિમ પરિવારોનું નામ કહેવાનો એમ કહીને ઇનકાર કર્યો હતો કે આવું કરવાથી વહીવટીતંત્ર આ લોકોની 'ઘર વાપસી'નો કાર્યક્રમ રોકવાનો પ્રયાસ કરશે. તેમણે ફક્ત એટલું જ કહ્યું કે 'ઘર વાપસી' કરનારા મોટા ભાગના પરિવારો ફૈઝાબાદ, આંબેડકર નગર, ગોંડા, બહરાઇચ અને સુલ્તાનપુરના છે. તેમણે દાવો કર્યો હતો કે આ દરેક મુસ્લિમ પરિવાર સ્વેચ્છાથી 'ઘર વાપસી' કરી રહ્યા છે.

 
વહીવટીતંત્રનું સખત વલણ
 
બીજી બાજુ, વિહિપના 'ઘર વાપસી' કાર્યક્રમને લઇને વહીવટીતંત્રનું વલણ સખત થઇ ગયું છે. ફૈઝાબાદના ડીઆઇજી સંજય કક્કડે કહ્યું કે કાર્યક્રમનો હેતુ ફક્ત સાંપ્રદાયિક તણાવે પેદા કરવાનો છે અને અમે એવું થવા દઇશું નહી. મુસ્લિમ લીગના સ્થાનિક નેતા નજમુલ હસને આ મામલામાં રામ વિલાસ વેદાંતીની ધરપકડની માંગ કરી છે.