Thursday, 1 January 2015

मॉक ड्रिल में नकली आतंकी को मुस्लिम टोपी पहनाने पर मचा बवाल, CM आनंदी बेन ने गलत ठहराया

मॉक ड्रिल में नकली आतंकी को मुस्लिम टोपी पहनाने पर मचा बवाल, CM आनंदी बेन ने गलत ठहराया
नई दिल्ली: गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने एंटी-टेरर मॉक ड्रिल के दौरान नकली आतंकियों को मुस्ल‍िम टोपी पहनाने को गलत ठहराया है। उन्होंने ज़ी मीडिया से बातचीत में कहा कि गुजरात पुलिस से गलती हुई मगर उन्होंने यह गलती जानबूझकर नहीं की।
सूरत पुलिस की असंवदेनशील हरकत को लेकर काफी विवाद खड़ा हो गया था। इस कारण से आनंदी बेन पटेल को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने माफी मांगनी पड़ी।
सूरत पुलिस ने ओलपाड के नजदीक डाभरी में यह मॉक ड्रिल कराई थी जिसमें स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को आतंकियों को रोकने का अभ्यास कराया गया था। इस दौरान जिन लोगों को नकली आतंकी बनाया गया था, उन्हें मुस्ल‍िम टोपी पहनाई गई थी।
गुजरात बीजेपी अल्पसंख्यक सेल के अध्यक्ष महबूब अली चिश्ती ने इस पर सख्त ऐतराज जताते हुए कहा कि मॉक ड्रिल में जो टोपी पहनाई गई, उसे तो नमाज के दौरान पहना जाता है। आतंकवादी भी हमले के वक्त वैसी टोपी नहीं पहनते हैं।

पाक जेल में कैसे दी जाती थी यातनाएं, पढ़ें एक भारतीय की आपबीती

अवैध तरीके से सीमा पार करने के आरोप में पाकिस्तान की जेल में सालों तक बंद रहे मध्य प्रदेश के बुधराम मार्को को वहां इतना प्रताड़ित किया गया कि वह विक्षिप्त हो गया। डिंडोरी जिले के विकासखंड करंजिया का रहने वाला 40 वर्षीय बुधराम 2 साल 4 महीने पाकिस्तान की जेल में रहने के बाद पिछले दिनों ही भारत लौटा है। बुधराम ने पाकिस्तान की जेल में दी गई यातनाओं के बारे में विस्तार से बताया है। बुधराम के मुताबिक, न केवल जेल के अधिकारी बल्कि साथी कैदी भी जब चाहे, उससे मारपीट करते रहते थे। जेल प्रशासन भी पाकिस्तानी कैदियों का पक्ष लेता था। यहां तक कि बुधराम की सजा की अवधि खत्म होने के बाद भी उसे आजाद नहीं किया गया था।

पाकिस्तान की जेल से छूटा बुधराम अपने परिजनों के साथ।

यातनाएं याद कर सिहर उठता है बुधराम

बुधराम के दिल से अभी भी पाकिस्तानी जेल का खौफ गया नहीं है। डरा-सहमा बुधराम फिलहाल खुलकर नहीं बोल पा रहा है। वह टूटे-फूटे शब्दों में बताता है, ''पाकिस्तान की जेल में भारतीय कैदियों के साथ बेहद बुरा बर्ताव किया जाता है। कभी भी नींद से उठाकर उनकी पिटाई की जाती है। कभी जेल प्रशासन की शह पर पाकिस्तानी कैदियों से भी उन्हें पिटवाया जाता है। भारतीय कैदियों को नमाज पढ़ने के लिए भी मजबूर किया जाता है।'' बुधराम के मुताबिक, जेल में उससे पत्थर तुड़वाए जाते थे। खाने में चावल और सब्जी मिलती थी।
 
लापता होने के तीन साल बाद मिला 

बुधराम नवंबर 2011 में लापता हो गया था। परिजनों ने उसकी तलाश भी की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। 2013 में जब आईबी की टीम घर पहुंची, तब पता चला कि बुधराम एक साल से पाकिस्तान की जेल में सजा काट रहा है। पुलिस का अनुमान है कि वह किसी के साथ पंजाब चला गया था। वहां से बुधराम अवैध रूप से बॉर्डर पार कर पाकिस्तान जा पहुंचा। वहां 5 जुलाई, 2012 को पाकिस्तानी फौज ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उस पर अवैध रूप से पाक सीमा में घुसने का मामला दर्ज किया था। 10 जुलाई, 2012 को पाक अदालत ने उसे एक साल की कैद व एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस हिसाब से उसकी सजा 10 जुलाई, 2013 को पूरी होनी थी। लेकिन उसे वापस नहीं लाया जा सका। बाद में सरकारी कोशिशों के बाद पिछले दिनों उसे पाकिस्तान ने अमृतसर में सेना के हवाले कर दिया, जहां से उसे वापस डिंडोरी लाया गया।
 
शक के घेरे में बुधराम 
बुधराम अपने घर पहुंच गया है, लेकिन वह सीमा पार करके पाकिस्तान कैसे पहुंचा, पुलिस इसका पता अभी तक नहीं लगा पाई है। इससे पहले भोपाल के तीन गांवों के कुछ लोग पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के लिए काले बिच्छुओं की तस्करी करते पकड़े गए थे। बुधराम के पास से पुलिस को पाकिस्तान का वीजा और बांग्लादेशी करंसी भी मिली है। यह वीजा किसने और किस उद्देश्य से बनवाया, पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है। इसके अलावा, इस बात की भी जांच की जा रही है कि वह किसके पास पंजाब गया था और उसे बांग्लादेशी करंसी कैसे मिली। डिंडोरी के एसपी युसुफ कुरैशी कहते हैं, "परिजनों के मुताबिक, उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, लेकिन मेरे हिसाब से इतनी भी खराब नहीं। उसे बहुत ज्यादा कुछ याद नहीं रहता। चूंकि उसके पास से पाकिस्तानी वीजा भी मिला है, इसलिए हम इस मामले की जांच करा रहे हैं। उस पर न केवल नजर रखी जा रही है, बल्कि उसके पास मिले सामानों की पड़ताल भी की जा रही है।"

Wednesday, 31 December 2014

पंजाब में ईसाइयों की ‘घर वापसी’, सिख धर्म अपनाया


ईसाई धर्म छोड़ फिर बने सिख

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी हुई संस्था धर्म जागरण मंच ने 40 ईसाइयों की 'घर वापसी' करा उन्हें सिख धर्म में शामिल कर लिया। मंगलवार को हुआ यह 'घर वापसी' का कार्यक्रम अमृतसर के ही पास गुरु की वादली के एक गुरुद्वारे में आयोजित हुआ था। यह दावा किया गया है कि जिन लोगों को सिख धर्म में वापस लाया गया है, वे ईसाइयत अपनाने से पहले मजहबी सिख (अनुसूचित जाति) थे।

धर्मान्तरित लोगों ने पहले पूजा-प्रार्थना की जिसके बाद उन्हें धार्मिक लॉकेट और सिरोपा दिए गए। इस मौके पर कोई बड़ा सिख संगठन मौजूद नहीं था। इलाके के ही कुछ सिखों ने आयोजकों और गुरुद्वारे के प्रबंधकों से पूछा कि क्या इसके (पुनर्धर्मांतरण के) बारे में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (एसजीपीसी) को बताया गया है। एक स्थानीय निवासी जगतार सिंह मान ने कहा, 'हम सारी जानकारी लेंगे और एसजीपीसी को इस बारे में बताएंगे।'

जब एक धर्मान्तरित महिला गुरमेज कौर (65) से पूछा गया कि वह सिख धर्म में वापस क्यों आईं, तो उन्होंने कहा, 'मैं बहुत गरीब हूं। मेरे पास अपने मकान का किराया चुकाने तक का पैसा नहीं है।' इसके बाद धर्म जागरण मंच के लोगों ने बीच में हस्तक्षेप किया और गुरमेज को सलाह दी कि वह रिपोर्टर्स से और बात न करें। इसी तरह भिंडर कौर (30) ने इस सवाल के जवाब में कहा कि वह गुरुद्वारे पर अपनी बहन के कहने पर आईं थीं।


जसबीर मसीह, जिनका नाम सिख धर्म अपनाने के बाद फिर से जसबीर सिंह हो गया है, ने कहा कि वह चार साल पहले ही ईसाई बने थे। उन्होंने कहा, 'लेकिन वे कह रहे थे कि हमें अपने घरों से शंकर भगवान और हमारे गुरुओं के चित्र भी घर से हटाने होंगे। यह बात मेरे बर्दाश्त के बाहर थी, इसलिए मैंने वापस अपने असली धर्म में आने का फैसला किया।'


धर्म जागरण मंच के कार्यकर्ता दिनेश शर्मा ने कहा कि एसपीजीसी के सदस्य पहले भी पुनर्धर्मांतरण कार्यक्रमों में उनकी मदद करते आए हैं और उन्हें इस आयोजन के बारे में भी सूचना दी गई थी। वहीं अमृतसर के बिशप पीके सामंतरॉय ने इस बात पर यकीन ही नहीं किया कि धर्मान्तरित लोग ईसाई थे। उन्होंने कहा, 'यदि वे अपने धर्म को जान रहे होते, तो ऐसा कभी नहीं करते। हमने कभी भी किसी को जबर्दस्ती ईसाई नहीं बनाया। ऐसे हालात में मैं निराश हूं, हमें समाज में सद्भाव लाना चाहिए।'

इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने शनिवार को फतेहगढ़ साहिब में एक कार्यक्रम के दौरान 'घर वापसी' की निंदा की थी। वहीं दूसरी और आरएसएस पंजाब में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित कराने की बात कर रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि इसकी वजह से शिरोमणि अकाली दल और सरकार में उसकी सहयोगी पार्टी बीजेपी में दरार और बढ़ेगी।

पटना : दो साल यौन शोषण, MMS बनाया, फिर कहा- मुस्लिम बनो तो करूंगा शादी



पटना: बिहार में एक लड़की को शादी का झांसा देकर बलात्कार करने और धर्म बदलने का दबाव डालने का मामला सामने आया है। मुजफ्फरपुर के 22 वर्षीय आरोपी मेराज जौहर ने पटना के कदमकुआं थाना इलाके में रहने वाली 18 वर्षीया लड़की को शादी का झांसा देकर दो साल तक दुष्कर्म किया। उसने लड़की की अश्लील क्लिपिंग भी बना ली थी और उसे कई माह से ब्लैकमेल कर रहा था।
जौहर चंडीगढ़ स्थित एक निजी संस्थान में कम्प्यूटर साइंस का तृतीय वर्ष का छात्र है। वह 22 दिसंबर को पटना पहुंचा और छात्रा को फोन कर इको पार्क बुलाया। उसने छात्रा से शादी करने के लिए धर्म परिर्वतन करने की शर्त रखी। इससे वह भड़क गई और उसने जौहर की सारी करतूतों की जानकारी परिजनों को दी। उसके बाद परिजन के कहने पर पीड़िता ने महिला थाने में जौहर के खिलाफ केस दर्ज कराया।
पीड़िता ने दुष्कर्म, धोखा देने और धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। पीड़िता पश्चिम बंगाल के एक निजी संस्थान में इलेक्ट्राॅनिक व कम्युनिकेशन की द्वितीय वर्ष की छात्रा है।

सहेली ने कराई थी जौहर से मुलाकात

पीड़िता ने प्राथमिकी में कहा है कि दो वर्ष पहले एक सहेली ने जौहर से पटना में मुलाकात कराई थी। उसके बाद से जौहर से फोन पर बातचीत होती रही। फिर प्यार हो गया। छुट्टी में कई बार वह घुमाने ले गया। शादी का वादा कर शारीरिक संबंध भी बनाए। उसने मेरी अश्लील तस्वीर भी बना ली और ब्लैकमेल करता रहा।

मेडिकल जांच होगी

थानेदार मृदुला कुमारी ने कहा, “छात्रा की मेडिकल जांच होगी और उसकी सहेली से पूछताछ होगी। आरोपी की तलाश की जा रही है।”

आतंक का चेहरा

मुंबई के आतंकी हमले के आरोपी जकीउर रहमान लखवी को पाकिस्तान ने कभी आतंकी माना ही नहीं, इसी का नतीजा है कि वहां की एक अदालत ने उसकी नजरबंदी को खारिज करने का फैसला दे दिया है। यह पूरा प्रकरण आतंकवाद पर पाकिस्तान के दोहरे रुख की फिर से पुष्टि करता है।

पेशावर में हुए हमले के बाद जब पाकिस्तानी सरकार आतंकवाद को जड़ से खत्म करने की दुहाई दे रही थी, ठीक उसी वक्त वहां की एक अदालत ने लखवी को मुंबई के 26/11 के हमले के सिलसिले में जमानत दे दी थी। लखवी को इस हमले में जीवित पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब के भारत में दिए गए बयान के आधार पर गिरफ्तार किया गया था, मगर पाकिस्तानी अदालत भारत द्वारा दिए गए सुबूतों को मान ही नहीं रही है। कसाब को भारतीय अदालत ने फांसी की सजा दे दी, पर पाकिस्तानी अदालत में यह मामला दो कदम भी आगे नहीं बढ़ सका है।

यही नहीं, इस हमले का असली साजिशकर्ता हाफिज सईद न केवल खुलेआम घूम रहा है, बल्कि लगातार भारत के खिलाफ भड़काऊ भाषण भी दे रहा है। भारत के कड़े रुख के बाद लखवी को रिहा भले न किया गया हो, पर उसे हिरासत में आतंकी धाराओं के तहत नहीं, बल्कि जनसुरक्षा आदेश के तहत रखा गया है और उस आदेश को भी अदालत ने पलट दिया है। इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि आतंकवाद पर पाकिस्तानी सरकार और वहां की फौज का रुख अलग-अलग है।

हकीकत यह है कि भारत के दबाव के बाद नवाज शरीफ सरकार ने लखवी की जमानत को ऊपरी अदालत में चुनौती देने का वायदा किया था, मगर आज तक उसने ऐसा नहीं किया है। उसे अदालत के फैसले की कॉपी लेने में ही एक हफ्ते लग गए! ऐसा नहीं हो सकता है कि पाकिस्तान अपनी जमीन से तो आतंकियों का सफाया कर ले और भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने दे। यह आग से खेलने जैसी बात है।

बंगलूरू में हुए ताजा धमाके में हालांकि यह पुष्टि नहीं हुई है कि इसे किस संगठन ने अंजाम दिया था, पर आतंकवाद भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, जिससे निपटने के लिए दोनों को एक दूसरे के साथ की जरूरत है। यदि अच्छे और बुरे तालिबान में फर्क नहीं है, तो भारत और पाकिस्तान में होने वाले आतंकी हमलों में भी फर्क नहीं किया जाना चाहिए।

जनता परिवार की जद्दोजहद !


जनता परिवार की जद्दोजहद !

सत्ता बनाए रखने और सत्ता हथियाने के मकसद से एक बार फिर गैर कांग्रेसी और गैर भाजपाई राजनैतिक दलों के मेल-मिलाप की गतिविधियां तेज हो गई हैं, और राजनैतिक हलकों से जो संकेत मिल रहे हैं उसके आधार पर कहा जा सकता है कि जल्दी ही गैर कांग्रेसी, गैर बीजेपी और गैर वामपंथी दलों की नई पार्टी बन जाएगी।
नए दलों का बनना और टूटना राजनीतिक प्रक्रिया की सामान्य घटनाएं हुआ करती हैं, लेकिन इस बार जिस प्रस्तावित समाजवादी जनता दल के गठन की कोशिश की जा रही है उसके पीछे सांप्रदायिक ताकतों के मुकाबले धर्मनिरपेक्ष ताकतों को लामबंद करने की दुहाई है। दिलचस्प बात ये है कि प्रस्तावित समाजवादी जनता दल में शामिल होने वाले ज्यादातर नेतागण समय-समय पर उन्हीं कथित सांप्रदायिक लोगों के साथ मिलकर सत्ता का सुख भोगते रहे हैं।
उदाहरण के लिए 1977 में इंदिरा गांधी के मुकाबले गठित जनता पार्टी में ये सभी कथित धर्मनिरपेक्ष नेतागण शामिल थे और आपातकाल के दौरान भी ये सभी नेतागण उन्हीं कथित सांप्रदायिक नेताओं के साथ 19 महीने जेल में भी रहे। ये अलग बात है कि सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने की महात्वाकांक्षा ने जनता पार्टी का विघटन करा दिया और dual citizenship का मुद्दा बनाकर ये सभी कथित धर्मनिरपेक्ष नेताओं ने खुद को अलग कर लिया। ऐसे धर्मनिरपेक्ष नेताओं को एक बार फिर राजीव गांधी के मुकाबले उन्हीं कथित सांप्रदायिक नेताओं के साथ मिलकर सत्ता में अंदर और बाहर हिस्सेदारी करते देखा गया जब वी पी सिंह को पीएम बनाने के लिए दोनों विचारधाराओं के लोग वामपंथी दलों के साथ एकजुट हो गए थे।
ऐसे नेताओं की राजनैतिक अवसरवादिता का सबसे बड़ा उदाहरण पं. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में संगठित होने वाले NDA में सहयोगी दलों के रूप में देखने को मिला था, जब पंडित अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में गठित NDA में शरद यादव जैसे दिग्गज समाजवादी और रामविलास पासवान जैसे गरीबों के मसीहा जैसे लोग मंत्रिमंडल में शामिल दिखाई दिए। अटल जी की अस्वस्थता के बाद NDA के संयोजक का पद हथियाते समय भी शायद समाजवादी शरद यादव को कहीं सांप्रदायिकता की बू नहीं आई ठीक इसी तरह नीतीश कुमार लंबे समय तक बीजेपी के साथ मिलकर बिहार में सरकार चलाते रहे। कमोबेश यही स्थिति कर्नाटक में एच डी देवगौड़ा की भी रही। एचडी देवगौड़ा के बेटे कुमारस्वामी बीजेपी के साथ मिलकर कुछ दिन तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे, रामविलास पासवान सरीखे नेता पहले से ही अवसरवादिता की राजनीति के लिए मशहूर रहे हैं।
 
अब इन नेताओं की बेचैनी का कारण अपना अस्तित्व बचाए रखना है।  नरेंद्र मोदी के सामने एक के बाद एक राजनैतिक पराजय झेल रहे ये नेतागण एक बार फिर वही घिसा-पिटा सांप्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता का राग अलाप रहे हैं ताकि 2016 में बिहार और 2017 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी राजनैतिक जमीन बचा सकें। समय के साथ खुद को अप्रासंगिक होते देख ऐसे नेताओं की मन:स्थिति का अंदाज़ा आपस में छत्तीस का आंकड़ा होते हुए भी इन के एक होने के प्रयासों में दिख रहा है। हालांकि इस बार तीसरे मोर्चे की कवायद से वामपंथी दलों ने खुद को अलग रखा है। ऐसे में बिना वामपंथी दलों के गैर बीजेपी और गैर कांग्रेसी दल मिलकर कितनी मजबूत पार्टी बना पाते हैं ये देखने वाली बात होगी।

सुरक्षा बलों को रक्षा मंत्री पर्रिकर का निर्देश, पाक को दोगुनी ताकत से जवाब दो


सुरक्षा बलों को रक्षा मंत्री पर्रिकर का निर्देश, पाक को दोगुनी ताकत से जवाब दो

 पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम का बार-बार उल्लंघन किए गए जाने की पृष्ठभूमि में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने सुरक्षा बलों को निर्देश दिया है कि वे पीछे न रहें और ‘दोगुनी ताकत’ के साथ जवाब दें।
उनकी यह टिप्पणी उस वक्त आई जब कल जम्मू जिले के पल्लनवाला सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा किए गए संघर्ष विराम उल्लंघन के दौरान भारतीय सेना का एक जवान घायल हो गया। बीते एक सप्ताह के दौरान पाकिस्तान की ओर से यह पांचवीं बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया।
पिछले साल की तुलना में नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम की घटनाओं में कमी आने का उल्लेख करते हुए पर्रिकर ने कहा कि हालांकि संघर्ष विराम के उल्लंघन की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बढ़ी हैं। यह पूछे जाने पर कि सुरक्षा बलों को क्या निर्देश दिया गया है, रक्षा मंत्री ने बीती रात पत्रकारों से कहा, ‘हमारी (राजग सरकार) प्रतिक्रिया यह है कि हिचकिचाना नहीं है। खुद को बिना रोके उचित ढंग से जवाब दें।’
उन्होंने कहा कि अगर सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन होता है तो भारतीय जवानों को ‘दोगुनी ताकत के साथ’ जवाब देना चाहिए और सेना की चौकियों पर हमला होता है तो आतंकवादियों को बेअसर करने की जरूरत है। रक्षा मंत्री पर्रिकर ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय जवान संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन नहीं करते, बल्कि वे पाकिस्तानी सैनिकों की ओर से इसका उल्लंघन किए जाने पर सिर्फ जवाब देते हैं।
असम में बोडो उग्रवादियों के हमले को लेकर पर्रिकर ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि सेना ने हमले पर प्रतिक्रिया करने में देर की और उन्होंने कहा कि सेना को स्थायी प्रशासन से आग्रह के लिए इंतजार करना पड़ा था। उन्होंने कहा, ‘हमले की खबरें मीडिया में आने के पहले से ही हम अलर्ट हो गए थे। वहां तैनात सैन्य बल तैयार थे, लेकिन हमें स्थानीय प्रशासन से आग्रह के लिए प्रतीक्षा करनी था।’
पर्रिकर ने कहा, ‘जैसे ही स्थानीय प्रशासन की ओर से आग्रह किया गया, हमनें सैन्य बलों को तैनात कर दिया।’ उन्होंने कहा कि असम में अब सेना की 73 टुकड़ियां तैनात हैं। राज्य में बोडो उग्रवादियों ने पिछले सप्ताह कई आदिवासियों को मार डाला था।

आतंकी संगठन इस्‍लामिक स्‍टेट ने टि्वटर यूजर्स से पूछा- 'जॉर्डन के पायलट की हत्‍या किस तरीके से करें'

इस्लामिक स्टेट की एक और अमानवीयता
बेरुत : आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) समूह ने जॉर्डन के पायलट को उसका विमान दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बंधक बना लिया था। पायलट का विमान पिछले सप्ताह उत्तरी सीरिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। अब आईएस ने क्रूरता की नई हदें पार करते हुए इस बार माइक्रो ब्लॉगिंग साइट टि्वटर के यूजर्स से जॉर्डन के बंधक बनाए गए पायलट की हत्या करने के तरीकों पर लोगों से सुझाव मांगे हैं।
गौर हो कि इराक और सीरिया में आतंक मचाने वाले इस संगठन ने सोशल मीडिया के जरिये भी दुनिया में अपने आतंक की धमक देनी शुरू कर दी है। उसके समर्थकों ने अरबी भाषा में लिखे गए एक पोस्ट को हजारों बार दोबारा टि्वट किया है जिसमें लिखा गया है, जॉर्डन के पायलट को मारने के तरीके पर अपना सुझाव दें। इस पोस्ट के बाद आईएस के कई समर्थकों ने मोआज के नाम से जाने जाने वाले पायलट फ र्स्ट लेफ्टिनेंट मुआथ अल खासेसबेह को मारने के तरीके बताते हुए बड़ी ही वीभत्स तस्वीरें और कई सुझाव पोस्ट किए हैं।
जॉर्डन के इस पायलट को आईएस ने गत 24 दिसंबर को बंधक बनाया था। पायलट का विमान सीरिया के रक्का प्रांत में गिरा था, जो आईएस के कब्जे वाले इलाकों की राजधानी मानी जाती है। आईएस ने इस विमान को मार गिराने का दावा किया है, लेकिन अमरीका ने उसके इस दावे को खारिज किया है। आईएस ने साथ ही पायलट के एक साक्षात्कार को अपनी मासिक अंग्रेजी भाषा की पत्रिका में प्रकाशित किया है। इसमें उससे पूछा गया है कि तुम्हें पता है कि आईएस तुम्हारे साथ क्या करेगा और वह इसका जवाब देता है कि हां, वह मुझे मार देगा। पायलट ने बताया कि उसका एफ 16 विमान किसी मिसाइल से टकराकर गिरा है। उसने साथ ही वायु सेना के अड्डे पर बिताई अपनी जिंदगी के कुछ पलों को भी बताया है।
उसने बताया कि वहां वह अमरीकी सैनिकों के साथ खाना खाता था। जॉर्डन ने अभी इस साक्षात्कार के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है। आईएस ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के किसी पायलट को बंधक बनाया है।
गौर हो कि इस्लामिक स्टेट समूह ने जॉर्डन के उस पायलट का एक साक्षात्कार प्रकाशित किया है जिसका विमान पिछले सप्ताह उत्तरी सीरिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। सितंबर के महीने में आईएस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गठबंधन द्वारा हवाई अभियान शुरू किये जाने के बाद से जार्डन का 26 वर्षीय पायलट चरमपंथियों के हाथ आने वाला पहला विदेशी सैन्य पायलट है।

सरकार एकतरफा नहीं लाएगी धर्मांतरण विरोधी कानून : वेंकैया नायडू


सरकार एकतरफा नहीं लाएगी धर्मांतरण विरोधी कानून : वेंकैया नायडू

तिरूवनंतपुरम : पुनर्धर्मांतरणों को लेकर विवाद उत्पन्न होने पर धर्मांतरण विरोधी कानून लाने का विचार व्यक्त करने वाली सरकार ने आज स्पष्ट किया कि वह ऐसा कानून एकतरफा तौर पर नहीं लाएगी।
केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री एम वेंकैया नायडू ने यहां कहा, ‘धर्मांतरण रोधी कानून लाना सरकार की प्राथमिकता नहीं है और सरकार का एकतरफा तौर पर धर्मांतरण विरोधी कानून लाने का कोई इरादा नहीं है।’ यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार किसी धर्मांतरण विरोधी कानून पर काम कर रही है, उन्होंने नकारात्मक जवाब दिया।
यद्यपि नायडू ने कहा, ‘यदि आमसहमति बनती है, यदि विपक्ष भी सोचता है कि इसकी जरूरत है, इस पर विचार किया जा सकता है।’ नायडू ने कहा कि सरकार की देश के कुछ हिस्सों में चल रहे ‘घर वापसी’ कार्यक्रमों में कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है।
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह नरेंद्र मोदी सरकार के विकास के एजेंडा को पटरी से उतारने के लिए धर्मांतरण का मुद्दा उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस कम्युनिस्टों की सहायता से सरकार के खिलाफ ‘दुष्प्रचार अभियान’ चला रही है।

ताजमहल तोड़कर बना लो गोडसे का मंदिर: आजम


फिर सुर्खियों में आजम

कानपुर में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे आजम खां ने एक सवाल पर ऐसा जवाब दिया कि वह फिर सुर्खियों में आ गए। 
आजम का कहना है कि वह चाहते हैं कि नाथूराम गोडसे को भारतरत्न मिले। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि ताजमहल तोड़कर गोडसे का मंदिर बनवा दिया जाए।
दरअसल बीते दिनों गोडसे को गांधी से बड़ा देशभक्त बताते हुए हिंदू महसभा ने गोडसे का मंदिर बनवाने की घोषणा की थी। 

इस घोषणा के बाद हिंदू महासभा की योजना पर आजम से प्रतिक्रिया मांगी गई। भड़के आजम खां ने तंज कसा कि इन संगठनों को तो देश के हर कोने में गोडसे का मंदिर बनवाना चाहिए। गुस्साए आजम बोले, अगर ताजमहल तोड़कर गोडसे का मंदिर बनाया जाता तो भी उन्हें कोई ऐतराज नहीं होगा।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक मंदिर के बावत पूछे गए एक सवाल पर आजम खां का जवाब था, ‘बापू की हत्या करने वाले गोडसे का मंदिर तो देश के हर जिले में बनना चाहिए। किसी को भी ऐतराज नहीं होगा।
मैं तो चाहता हूं कि गोडसे को भारतरत्न मिले। वैसे तो मस्जिद तोड़कर मंदिर नहीं बनाया जाना चाहिए पर गोडसे के मंदिर के लिए अगर ताजमहल तोड़कर ऐसा किया गया तो कोई मना नहीं करेगा।’