Saturday, 22 November 2014

पाकिस्तान में हिंदू मंदिर में तोड़फोड़, धार्मिक किताबों को किया आग के हवाले

पाकिस्तान में हिंदू मंदिर में तोड़फोड़, धार्मिक किताबों को किया आग के हवाले

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में कुछ अज्ञात लोगों द्वारा हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ का मामला सामने आया है। घटना दक्षिणी सिंध प्रांत की है। वहां के हिंदुओं और स्थानीय राजनीतिक दलों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में हिंदू मंदिर लगातार उपद्रवियों के निशाने पर रहे हैं। पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के नेता रमेश वंशवानी ने कहा, "गुरुवार देर रात तांडो मोहम्मद खान जिले में एक छोटे से हिंदू मंदिर में स्थापित मूर्ति व धार्मिक किताबों को आग के हवाले कर दिया गया।" उन्होंने कहा, "अब तक पता नहीं चल पाया है कि इसके पीछे किसका हाथ है। पुलिस ने अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज कर लिया है।"
वंशवानी ने कहा, "चश्मदीदों के मुताबिक, उस रात चार लोगों को दो मोटरसाइकिल से भागते देखा गया।" हालांकि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी नसीम आरा पनवार ने मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की है। उन्होंने कहा है कि जिसे हिंदू मंदिर बताया जा रहा है, वह दरअसल एक प्लेटफॉर्म था, जिस पर लोगों ने मूर्तियां रखी थीं।
काउंसिल ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए पाकिस्तान सरकार से मंदिरों को संरक्षण देने की मांग की। परिषद की मांग है कि पाकिस्तान में राष्ट्रीय स्तर पर हिंदू धर्मस्थलों को सुरक्षा प्रदान करने का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश भर में ऐसे 1400 हिंदू धार्मिक स्थल हैं, जिन्हें सुरक्षा और संरक्षण प्रदान करने की जरूरत है। काउंसिल ने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा संबंधी आदेश का कड़ाई से पालन हो तो, भविष्य में ऐसी घटनाएं टाली जा सकती हैं। 

हनुमान मंदिर में पढ़ी गई नमाज: पुजारी ने की मदद, उलेमाओं ने भी ठहराया जायज

हनुमान मंदिर में पढ़ी गई नमाज: पुजारी ने की मदद, उलेमाओं ने भी ठहराया जायज
 हनुमान मंदिर में नमाज अता करती दो ईरानी महिलाएं

आगरा. ताजमहल का दीदार करने आई ईरानी महिलाओं ने गुरुवार को ताज व्यू चौराहे के पास हनुमान मंदिर में नमाज अता की। इस दौरान वहां फूल बेचने वाले ने उन्हें फर्श पर बिछाने के लिए अखबार दिया। मंदिर के पुजारी ने भी उनकी मदद की। इसके बाद इस मामले को लेकर बहस छिड़ गई। हिंदू-मुस्लिम धर्म के लोग अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। इसमें इस्लामी विद्वान मौलाना नदीमुल वाजदी का कहना है कि किसी भी पाक-साफ स्थान पर नमाज अता की जा सकती है। वहीं देवबंदी उलेमाओं ने भी इसे जायज ठहराया है।
 
ईरानी महिलाएं गुरुवार को ताजमहल का दीदार करने के लिए आगरा पहुंची थी। वह इसके बाद ताज व्‍यू चौराहे के पास पहुंची। शाम को अशर की नमाज का वक्‍त हो गया। उसने आस-पास मौजूद लोगों से फारसी भाषा में ही मस्जिद के लिए पूछा, लेकिन कोई उनकी बात नहीं समझ सका। कुछ देर वह भटकती रहीं। इसके बाद दोनों को हनुमान मंदिर दिखा। मंदिर के बाहर फूल बेचने वाले श्रवण इशारों से समझ गया कि उन्हें नमाज पढ़ना है। उसने महिलाओं को वहीं नमाज अता करने को कहा। 
 
कोई नहीं समझ पा रहा था दोनों की बात 
श्रवण ने बताया कि महिलाओं को बिलकुल उम्‍मीद नहीं थी कि मंदिर में नमाज अता करने के लिए जगह मिलेगी। जब उसने नमाज के लिए इशारा किया तो महिलाएं बेहद खुश हुईं। महिलाओं ने इशारा करके फर्श पर बिछाने को अखबार मांगा। उसने बताया कि उसने अखबार दिया और इसी को बिछाकर महिलाओं ने नमाज अता की।
 
पुजारी ने कहा- मंदिर सबके लिए है
मंदिर के पुजारी रामब्रज शास्‍त्री कहते हैं कि इबादत के तरीके भिन्‍न-भिन्‍न हो सकते हैं, लेकिन भगवान और अल्‍लाह एक हैं। वह ईरानी पर्यटकों का नाम भी नहीं जानते हैं। मंदिर सबके लिए है। धर्म के नाम पर यहां पर किसी को आने और इबादत करने से नहीं रोका जाना चाहिए। यही उन्‍होंने किया। नमाज जिस तरफ से महिलाएं अता कर रही थीं, उस ओर मंदिर का पट बंद था।

Friday, 21 November 2014

शनि देव तीनों लोकों के न्यायाधीश

शनि देव


 


धार्मिक मतानुसार शनि ग्रह के देवता शनि देव तीनों लोकों के न्यायाधीश हैं। शनि देव का न्याय पक्षरहित माना जाता है। वह न्याय के बीच अपने पिता (सूर्य देव) को भी नहीं आने देते। शनि देव महादशा (19 वर्षों के लिए), साढ़ेसाती (साढ़े सात वर्षों के लिए) और ढैय्या (ढाई वर्षों के लिए) में जातक को उसके कर्मों का फल देते हैं। जो अच्छे कर्म करते हैं उन्हें अच्छा फल और बुरे कर्म करने वालों को बुरा फल मिलता है।
शनि साढ़ेसाती यदि आपको अपने जन्म समय और जन्म स्थान की सही जानकारी है तो आप नीचे दिए गए सर्च रिजल्ट्स पर क्लिक कर अपने जीवन में शनि साढ़ेसाती के विषय में जानकारी पा सकते हैं:

शनि साढ़ेसाती

ज्योतिषानुसार जब जन्म राशि (चन्द्र राशि) से गोचर में शनि द्वादश, प्रथम एवं द्वितीय स्थानों में भ्रमण करता है, तो साढ़े सात वर्ष के इस समय को शनि की साढ़ेसाती कहते हैं। (शनि को एक राशि से गुजरने में इसे ढाई वर्ष लगते हैं)
साढ़ेसाती के प्रभाव अधिकतर ज्योतिषियों का मानना है कि साढ़ेसाती का प्रभाव पूरे समय के लिए बुरा नहीं होता। इस समय का मात्र कुछ भाग ही कष्टकारी होता है बाकी का समय इंसान के लिए शुभ होता है। लेकिन कई बार इस अल्पकाल के अशुभ समय में ही इंसान मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह टूट जाता है।

शनि की महादशा

शनि एक मंद ग्रह है इसलिए वह किसी भी जातक की कुंडली में 19 साल के लंबे समय के लिए रहता है। यह समय शनि की महादशा कहलाती है। "महादशा" व्यक्ति के जन्म समय से निर्धारित होता है। जिस ग्रह की महादशा के अंतर्गत जातक का जन्म हुआ होता है उसके अगले क्रम में अन्य ग्रहों की महादशाएं आती रहती हैं। 
शनि की महादशा के प्रभाव
लोगों को प्राय: यह भ्रम होता है कि शनि की महादशा के दौरान उन्हें सिर्फ कष्ट ही कष्ट होगा। लेकिन ज्योतिष इस तथ्य को सही नहीं मानता। ज्योतिषानुसार महादशा के समय शनि खुद अपना प्रभाव नहीं दिखाते, बल्कि इस दौरान जातक को शनि के शत्रु ग्रहों की वजह से हानि होती है

शनि साढ़ेसाती से बचने के उपाय

शनि की साढ़ेसाती अगर किसी जातक पर बहुत भारी यानि कष्टकारी हो रही हो तो उसे शनि को शांत करने के उपाय करने चाहिए। शनि के उपाय करने के लिए पहले कुंडली में शनि की दशा, स्थान, भाव आदि पर भी विचार करना जरूरी है। 
जिन जातकों को शनि साढ़ेसाती से परेशानी हो उन्हें निम्न उपाय करने चाहिए: 

* सुन्दरकाण्ड या हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करना चाहिए। 
* शनिवार को प्रात: काल पीपल के पेड़ पर जलदान करने से भी शनि पीड़ा से शांति मिलती है।
* मान्यता है कि शनि साढ़ेसाती के दौरान काले घोड़े के नाल की अंगूठी या नाव के कील की अंगूठी भी जातक के लिए लाभप्रद होती है। 
* शनिवार का व्रत और शनिवार को दान देने से भी शनि साढ़ेसाती के दौरान होने वाली पीड़ा से शांति मिलती है। 
** शनि देव से जुड़ी वस्तुएं जैसे काली उड़द की दाल, तिल, लौह, काले कपड़े आदि का दान देना चाहिए। 
* शनि शांति के लिए शनि दोष शांति यंत्र का प्रयोग भी किया जा सकता है। 
अन्य उपयोगी साम्रगी: शनि चालीसा 

शनि महादशा से बचने के उपाय

यह एक भ्रम है कि शनि की महादशा के दौरान जातक को सिर्फ कष्ट ही होते हैं। ज्योतिषी बताते हैं कि शनि की महादशा कई बार जातक के लिए शुभ और फलदायी साबित होती है। लेकिन अगर शनि की महादशा जातक के लिए कष्टकारी साबित हो तो उन्हें शनि शांति के उपाय करने चाहिए। 
शनि की महादशा और उससे जुड़े कुछ सामान्य उपाय
* रोटी पर सरसों का तेल लगाकर गाय या कुत्ते को खिलाना चाहिए। 
* शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। पीपल के पेड़ पर तिल और सरसों का तेल चढ़ाना चाहिए। 
* शनि मंत्र "ऊँ शं शनैश्चराय नम:" और शनि स्तोत्र का नित्य जाप करना चाहिए। 
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 शनि की शांति के लिए नीलम को धारण करने का भी विधान है। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि नीलम एक शक्तिशाली रत्न है जिसको धारण करने से पहले किसी रत्न विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है। 
शनि धाम और शनि देव के प्रमुख मंदिर
हिन्दू धर्म में शनि देव का स्थान बेहद अहम है। शनि देव के प्रमुख धाम निम्न हैं:
* श्री शनि तीर्थ क्षेत्र (असोला, फतेहपुर बेरी): यह मंदिर दिल्ली के महरौली में स्थित है। यहां शनि देव की सबसे बड़ी मूर्ति विद्यमान है जो अष्टधातुओं से बनी है। 
* शनि शिंगणापुर (महाराष्ट्र, अहमदनगर जिला): महाराष्ट्र में स्थित इस मंदिर की ख्याति देश ही नहीं विदेशों में भी है। कई लोग तो इस स्थान को शनि देव का जन्म स्थान भी मानते है। शिंगणापुर के अधिकांश घरों में खिड़की, दरवाजे और तिजोरी नहीं है। दरवाजों की जगह यहां मात्र पर्दे लगाए जाते हैं।
* शनिचरा मंदिर (मध्यप्रदेश, मुरैना): यहां शनि देव का सबसे प्राचीन मंदिर होने की बात कही जाती है। कहते हैं कि हनुमान जी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त करा उन्हें मुरैना पर्वतों पर विश्राम करने के लिए छोड़ा था। मंदिर के बाहर हनुमान जी की मूर्ति भी स्थापित है।


૧૧ વખત કૈલાસ માનસરોવર યાત્રા કરનાર ડો. યશવંત ગોસ્‍વામીનું વિશેષ સન્‍માન થશે


 ૧૧ વખત કૈલાસ માનસરોવર યાત્રા કરનાર ડો. યશવંત ગોસ્‍વામીનું વિશેષ સન્‍માન થશે

રાજકોટ,: આગામી તા.ર૩ નવે.ને રવિવારના રોજ દશનામ ગોસ્‍વામી 
જાગૃતિ મંડળ દ્વારા આયોજીત વિદ્યાર્થી અને વ્‍યકિત વિશેષ સન્‍માન 
કાર્યક્રમ દરમ્‍યાન કણસાગરા મહિલા કોલેજના હિન્‍દી વિભાગના 
અધ્‍યક્ષ, રાષ્‍ટ્રીય સેવા યોજનાના પ્રોગ્રામ ઓફીસર અને સપ્તધારાના
 કો-ઓર્ડીનેટરડો.યશવંતગિરિ કે. ગોસ્‍વામીનું હેમુ ગઢવી હોલમાં
 વિશેષ સન્‍માન થશે તેમ મંડળની યાદીમાં જણાવ્‍યું છે.
   સૌરાષ્‍ટ્રના જાણીતા અગ્રણીઓ સર્વશ્રી  ગોવિંદભાઇ પટેલ, 
વિજયભાઇ રૂપાણી, મેયર રક્ષાબેન બોળીયાની હાજરીમાં  
ડો. યશવંત ગોસ્‍વામીનું છેલ્લા ૧પ વર્ષથી કૈલાસ માનસરોવર
 યાત્રાનું સફળ આયોજન કરી ૩૦૦થી વધુ યાત્રિકોને શિવાનુ ભૂતિની
 યાત્રા કરાવનાર, છેલ્લા રપ વર્ષથી અમરનાથ યાત્રા અંગે વિશેષ
  કાર્ય કરનાર અને તાજેતરમાં રાજકોટથી સોમનાથની પદયાત્રા પુત્ર
 શિવમ્‌ સંગાથે વિશેષ ભાવ સાથે પૂર્ણ કરવા બદલ સન્‍માનીત
 કરવામાં આવશે. ડો. ગોસ્‍વામી આ પહેલાં સમાજની વિવિધ સંસ્‍થાઓ દ્વારા દશનામ વિદ્યાસાગર એવોર્ડ, દશનામ શ્રેષ્‍ઠી એવોર્ડ, દશનામ જ્ઞાતિ રત્‍ન એવોર્ડ અને દશનામ ગૌરવ એવોર્ડથી સન્‍માનિત થઇ ચૂકયા છે. ૧૧ વખત કૈલાશ માનસરોવર યાત્રા કરી છે.
   ડો.ગોસ્‍વામી દ્વારા લિખિત ‘‘કૈલાસ માનસરોવર યાત્રા-એક મહાપ્રસ્‍થાન'' અને અમરનાથ યાત્રા પુસ્‍તક લોકપ્રિય બન્‍યાછે. તાજેતરમાં સોમનાથની પદયાત્રાના અનુભવો વર્ણવતુ પુસ્‍તક ‘પદયાત્રા અને પરિક્રમા'નું લેખન કાર્ય કરીરહ્યા છે. ડો. ગોસ્‍વામીના આ ઉપરાંત હિન્‍દી-ગુજરાતીમાં ૧પથી વધુ પુસ્‍તકો પ્રકાશિત થઇ ચૂકયા છે. દિલ્લીથી પ્રકાશિત ‘કૈલાસવાણી' સામયિકના  સહ સંપાદક ઉપરાંત હિન્‍દીવિષયના નેશનલ-ઇન્‍ટરનેશનલ જર્નલમાં પણ તેઓ સહ સંપાદનની જવાબદારી નિભાવી રહ્યા છે. સૌરાષ્‍ટ્ર-ગુજરાતના હિન્‍દી અને ગુજરાતી અખબારોમાં તેમના લેખ સમયાંતરે પ્રસિધ્‍ધ થાય છે. જર્નાલીઝમમાં ગોલ્‍ડમેડલ મેળવેલ છે.
   સતત સાત કલાક સુધી સોમનાથ મંદિરમાં ૐ સોમનાથ જયોર્તિલિંગાયનમઃ નો ૧૧,૦૦૦ વખત મંત્ર જાપ, પૂજા અર્ચન, પ્રદક્ષિણા કરવાની સાથે કૈલાસ માનસરોવરના પવિત્ર જળથી શિવલિંગ પર ૫ વખત અભિષેક કરાવ્‍યો.
   ડો.ગોસ્‍વામીએ પદયાત્રા પૂર્વે જ સંકલ્‍પ કરેલો કે એકલા જ પદયાત્રા કરવી. અલખને ઓટલે આરામ કરવો અને માત્ર શિવાલયમાં જ રાત્રિ નિવાસ કરવો.  શિવાલયમાં મોડી રાત્રી સુધી પૂજા-અર્ચના-પ્રાર્થના અને પ્રદક્ષિણા કરવી. સાંસારીક વાદ-વિવાદ-ફરિયાદ અને ભૌતિક  સુખ-સુવિધાથી દૂર રહી દિવસ રાત મૌન રહી માત્ર શિવ સ્‍મરણ કરવું. દિવસ દરમ્‍યાન માત્ર એક જ વખત ભોજન કરવુ અને દિવસ રાત શિવનું ભજન કરવું.
   એટલેજ ૨૧૦ કિ.મી.ની  સોમનાથ પદયાત્રા દરમ્‍યાન  તમામ સંકલ્‍પો સિધ્‍ધ થઇ શકયા હોવાનું શ્રી દશનામ ગોસ્‍વામી જાગૃતિ મંડળના પ્રમુખ વિનોદભારથી  ગોસ્‍વામીએ જણાવ્‍યુ છે.
   ડો. યશવંત ગોસ્‍વામી
   (મો ૯૪ર૭૪ ૯પ૧૭પ)

योगीजी का युवाओ को सन्देश




हिन्दू भाव सर्वत्र जग रहा करना इसको विस्तृत तेज ।
कमर कसो ऐ हिन्दू युवकों ,जागृत कर दे सारा देश ।।
शक्ति शील को अजिर्त करके, चंद्रगुप्त
की राह पे चलना।
दुस्साहस कर शत्रु आया, पलटवार से उसे कुचलना ।
सबल संगठित एक राष्ट्र का, देना जग को हैं सन्देश ।।
कमर कसो ऐ हिन्दू युवको, जागृत कर दे सारा देश ।।
जाति पाति के भाव मिटाकर, सबको गले लगाना हमको ।
बढे परस्पर भाईचारा, हिन्दू एकजुट लाना हमको ।
जिनसे हम कमजोर हैं होते, तजने होगें सारे भेद ।।
कमर कसो ऐ हिन्दू युवको, जागृत कर दे सारा देश ।
सघं-दीप की निमर्ल ज्योति, निस्स्वार्थ
जलती बाती ।
देश के हर एक गाँव नगर से,घोर निराशा तमस मिटाती ।
आशा और विश्वास है हम पर ,बढेगा आगे सारा देश ।।
कमर कसो ऐ हिन्दू युवको, जागृत कर दे सारा देश।।
।। वन्दे मातरम् ।।

योगीजी ने लगाई हिंदुत्व की ललकार


जय सोमनाथ महादेव


Thursday, 20 November 2014

गौ हत्या के खिलाफ आंदोलन जरुरी


હિન્દુત્વ અમારી ઓળખાણ


पाक के रास्ते थार एक्सप्रेस से हो रही हेरोइन तस्करी

अफगानी ड्रग्स माफिया थार एक्सप्रेस के जरिये पाकिस्तान के रास्ते भारत में हेरोइन की तस्करी कर रहा है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चप्पलों के तले में छिपाकर भेजी गई 36 किलोग्राम हेरोइन बरामद कर अफगानी महिला व उसके सहयोगी समेत छह ड्रग्स तस्करों को गिरफ्तार किया है।
आरोपियों की पहचान मुहम्मद, जमीर उर्फ डॉक्टर, सलीम खान, बाबा फकरुद्दीन, चांदबाशा और साकिबा के रूप में हुई है। गिरोह के तार दिल्ली से दक्षिण भारत तक फैले हैं। थार एक्सप्रेस कराची से जोधपुर के बीच चलती है।
स्पेशल सेल के अनुसार, मुहम्मद और साकिबा अफगानिस्तान के रहने वाले हैं। 2010 में पति की बम धमाके में मौत के बाद साकिबा भारत में आकर रहने लगी थी। यहां वह दुभाषिये का काम करती है, जबकि मुहम्मद का काबुल में कपड़ों का कारोबार है। इस सिलसिले में अक्सर वह दिल्ली में ही रहता है।
बाद में उसने ड्रग्स तस्करी का धंधा शुरू कर दिया था। इसमें उसने जामा मस्जिद इलाके के हींग तथा मसाला कारोबारी सलीम को अपने साथ मिला लिया था। सलीम अपने गुर्गे जमीर की मदद से हेरोइन की खेप सप्लाई करता था।
अधिकारियों की मानें तो धरे गए आरोपी ड्रग्स तस्करी के धंधे में प्यादे भर हैं। असली कमान तो अफगानिस्तान व दक्षिण भारत में बैठे सरगनाओं के हाथ है। पूछताछ में मुहम्मद ने बताया कि उसको फोन पर बताया जाता था कि थार एक्सप्रेस से माल पहुंचने वाला है। इसके बाद उसे यह भी बताया जाता कि डिलीवरी किसको देनी है।
सीमांध्र का रहने वाला चांदबाशा ड्रग्स तस्करों के दक्षिण भारतीय नेटवर्क का हिस्सा है। वह 1985 में आईटीआई से डिप्लोमा कर चुका है। कई कारोबार करने के बाद सफलता नहीं मिली तो उसने ड्रग्स तस्करी का धंधा पकड़ लिया।